नई दिल्ली: ओमान के समुद्री क्षेत्र में हाल ही में हुए जहाजों पर हमलों के बाद भारत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है. इन हमलों में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि कई भारतीय नाविक प्रभावित जहाजों पर सवार थे. भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक प्रतिनिधि को तलब किया और अपना विरोध दर्ज कराया. साथ ही क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं. उनका कहना था कि समुद्री मार्गों पर असुरक्षा का माहौल क्षेत्रीय संघर्षों का परिणाम है और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा नाविकों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकना आवश्यक है और सभी पक्षों को संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए.
हाल के दिनों में ओमान के पास भारतीय चालक दल वाले तीन अलग-अलग विदेशी ध्वजांकित जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं. इनमें एमटी मारिवेक्स नामक जहाज भी शामिल है, जिसके दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. अधिकारियों के अनुसार, बचाए गए नाविकों की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
दूसरी घटना में एमटी सेटेबेलो नामक जहाज पर मौजूद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश तीन भारतीय नागरिकों की जान चली गई. सरकार ने मृतकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए संबंधित देशों और एजेंसियों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है.
इसी बीच, शिनास बंदरगाह के निकट गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले बिटुमेन टैंकर एमटी जलवीर से जुड़ी एक सुरक्षा घटना भी सामने आई. जहाज पर सवार सभी 20 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम जारी है और किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है.
सरकार ने कहा है कि वह विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, विदेश स्थित भारतीय मिशनों और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है. भारत ने दोहराया कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति की बहाली के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है. First Updated : Thursday, 11 June 2026