सड़क हादसे से दहला झारखंड, एक ही परिवार के 5 लोगों की हुई दर्दनाक मौत

धनबाद की तरफ जा रही सेलेरियो कार संख्या JH 10 CU 3472 दनुआ घाटी में एक ट्रेलर से जा टकराई। स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार ट्रेलर के पीछे पूरी तरह से घुस गई।

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नई दिल्ली: झारखंड के हजारीबाग जिले की दनुआ घाटी एक बार फिर खौफनाक हादसे की गवाह बनी। शनिवार शाम करीब 6:30 से 7 बजे के बीच चौपारण थाना क्षेत्र के जोडराही पुल के पास हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर मौत हो गई।

इस दुर्घटना के बाद मृतकों में दो पुरुष, एक महिला और दो मासूम बच्चे शामिल हैं। अंधेरा होने की वजह से कार में कितने लोग सवार थे, इसकी सही गिनती नहीं हो पाई। आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

बेहद दर्दनाक था ये एक्सीडेंट 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार धनबाद की तरफ जा रही सेलेरियो कार संख्या JH 10 CU 3472 दनुआ घाटी में एक ट्रेलर से जा टकराई। स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार ट्रेलर के पीछे पूरी तरह से घुस गई। कार संभल पाती, उससे पहले ही पीछे से आ रहे एक और ट्रक ने उसे चपेट में ले लिया।

दोहरी टक्कर से कार पूरी तरह पिचक गई और मलबे में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना भयानक था कि कार के परखच्चे उड़ गए। अंदर बैठे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। शव इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए कि पहचान करना मुश्किल हो गया। हादसे के बाद दोनों ट्रक चालक मौके से फरार हो गए।

'मौत की घाटी' बनी दनुआ 

आपको बताते चलें कि घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी अजीत कुमार विमल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कार इतनी बुरी तरह पिचक चुकी थी कि शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। देर रात तक मृतकों की पहचान नहीं हो सकी थी।

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को खबर दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना है कि दनुआ घाटी अब “मौत की घाटी” बन चुकी है। यहां हर साल सैकड़ों हादसे होते हैं और दर्जनों जानें जाती हैं। इसके बावजूद प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

लोगों का आरोप है कि हर बड़े हादसे के बाद कुछ दिन सख्ती दिखती है, फिर सब पहले जैसा हो जाता है। दनुआ घाटी रोज किसी न किसी की जिंदगी लील रही है। अब वक्त आ गया है कि यहां स्थायी और सख्त इंतजाम किए जाएं, ताकि कोई और परिवार इस घाटी में अपना चिराग न खोए। First Updated : Saturday, 25 April 2026