नकद विवाद के बीच न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का इस्तीफा, राष्ट्रपति को भेजा पत्र
नकदी बरामदगी विवाद में घिरे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया है.राष्ट्रपति को भेजे गए उनके इस्तीफे के साथ ही उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया भी खत्म मानी जा रही है.

नई दिल्ली: नकदी बरामदगी विवाद में घिरे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से हटते हुए अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है.
यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया जारी थी. दिल्ली स्थित उनके आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ था.
इस्तीफे में जताई पीड़ा
न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने इस्तीफे में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा,"यद्यपि मैं आपके सम्मानित कार्यालय को उन कारणों से बोझिल नहीं करना चाहता, जिनके कारण मुझे यह पत्र प्रस्तुत करना पड़ा है, लेकिन मैं अत्यंत पीड़ा के साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे रहा हूं,"
उनके इस बयान से साफ है कि उन्होंने भारी मन से यह निर्णय लिया.
महाभियोग प्रक्रिया पर असर
सूत्रों के अनुसार, उनके इस्तीफे के साथ ही उनके खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाएगी.
लोकसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पद छोड़ने के बाद अब उन्हें हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 14 मार्च 2025 को सामने आया था, जब दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में स्थित उनके आधिकारिक आवास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई थी. उस समय वे दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे.
बताया गया कि जली हुई नकदी नौकरों के क्वार्टर के पास बने एक स्टोररूम में मिली थी. उस समय न्यायमूर्ति वर्मा और उनकी पत्नी भोपाल में मौजूद थे.
सुप्रीम कोर्ट ने गठित की जांच समिति
घटना के एक सप्ताह बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए तीन न्यायाधीशों की एक आंतरिक समिति बनाई थी.
4 मई को इस समिति ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को सौंप दी थी.
न्यायिक कार्य से किया गया था अलग
जांच के दौरान न्यायमूर्ति वर्मा से दिल्ली उच्च न्यायालय में उनके न्यायिक कार्यभार वापस ले लिए गए थे.
इसके बाद उन्हें उनके मूल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्हें किसी भी प्रकार का न्यायिक कार्य नहीं सौंपने के निर्देश दिए गए थे.
सबूत सार्वजनिक करना बना अभूतपूर्व कदम
इस मामले में एक असामान्य कदम उठाते हुए अदालत ने कथित नकदी बरामदगी से जुड़े फोटो और वीडियो भी सार्वजनिक किए थे.
यह कदम न्यायिक पारदर्शिता के लिहाज से बेहद अहम माना गया.
आरोपों से किया इनकार
न्यायमूर्ति वर्मा ने पूरे मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने या उनके परिवार के किसी सदस्य ने उस स्टोररूम में कभी नकदी नहीं रखी.उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कमरा सभी के लिए सुलभ था.


