भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में लगातार सामने आ रही आत्महत्या की घटनाओं ने प्रशासन और पुलिस महकमे की चिंता बढ़ा दी है. पिछले 12 दिनों में पांच पुलिसकर्मियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के मामलों ने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्य के दबाव और व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ताजा मामला ग्वालियर जिले के डबरा सिटी थाना क्षेत्र का है. यहां तैनात आरक्षक राघवेंद्र तोमर ने अपने सरकारी आवास में फांसी लगाकर जान दे दी. बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले उन्होंने अपनी पत्नी को वीडियो कॉल किया था.
परिजनों के अनुसार, उन्होंने कॉल पर आखिरी बार पत्नी को अलविदा कहा और उसके बाद यह कदम उठा लिया.जब काफी देर तक उनका फोन नहीं उठा तो परिजनों ने पुलिसकर्मियों को सूचना दी. मौके पर पहुंचे साथियों ने उन्हें फंदे पर लटका पाया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
बीते कुछ दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं. मंडला में एक आरक्षक ने कथित ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर आत्महत्या कर ली. गुना में एक महिला आरक्षक ने पुलिस क्वार्टर में फांसी लगा ली. वहीं छिंदवाड़ा में एक महिला प्रधान आरक्षक का शव घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था. उमरिया में एक सब-इंस्पेक्टर ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी.
लगातार हो रही इन घटनाओं ने पुलिस विभाग के भीतर बढ़ते तनाव और मानसिक दबाव की ओर ध्यान खींचा है. पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक ड्यूटी, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक दबाव और संवेदनशील मामलों से लगातार जूझना पड़ता है. ऐसे में मानसिक थकान और अवसाद जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिसकर्मियों के लिए नियमित काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम और मनोवैज्ञानिक सहायता बेहद जरूरी है. विभाग के भीतर ऐसा माहौल तैयार करने की आवश्यकता है जहां कर्मचारी अपनी परेशानियां खुलकर साझा कर सकें और समय रहते मदद प्राप्त कर सकें.
लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है. अब उम्मीद की जा रही है कि पुलिस बल के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और तनाव कम करने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके. First Updated : Sunday, 14 June 2026