महाराष्ट्र में ऑटो चालकों के लिए मराठी सीखना जरूरी! 1 मई से शुरू होगा बड़ा अभियान

महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा को लेकर विशेष वेरिफिकेशन अभियान शुरू होने जा रहा है. इस पहल के जरिए नियमों के पालन के साथ चालकों को भाषा सीखने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा.

Shraddha Mishra

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, जिससे राज्य में भाषा और स्थानीय पहचान को मजबूत करने की कोशिश साफ नजर आती है. अब इस फैसले को जमीन पर लागू करने के लिए एक विशेष वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया जा रहा है, जो आने वाले महीनों में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य न सिर्फ नियमों को लागू करना है, बल्कि चालकों को मराठी सीखने के लिए प्रोत्साहित करना भी है.

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने जानकारी दी है कि यह विशेष अभियान 1 मई से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान राज्यभर में ऑटो-रिक्शा चालकों की जांच की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि वे निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं. खास बात यह है कि यह अभियान महाराष्ट्र के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) के माध्यम से संचालित किया जाएगा.

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी एक विशेष समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रविंद्र गायकवाड़ करेंगे. समिति रोजाना और साप्ताहिक आधार पर अभियान की प्रगति की समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर आरटीओ को दिशा-निर्देश भी देगी.

मराठी न जानने पर रद्द नहीं होगा लाइसेंस

सरकार ने इस अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है कि केवल मराठी भाषा न जानने के आधार पर किसी भी चालक का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाएगा. इससे यह साफ होता है कि सरकार का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना है.

हालांकि, यदि कोई चालक अन्य नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है या अवैध परिवहन गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने कहा कि सभी कदम मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत ही उठाए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह की मनमानी से बचा जा सके.

मराठी भाषा को लेकर सरकार का रुख

प्रताप सरनाईक ने दो टूक कहा कि अगर कोई व्यक्ति महाराष्ट्र में काम करना चाहता है, तो उसे मराठी भाषा का ज्ञान होना चाहिए. उनका मानना है कि यह स्थानीय संस्कृति और लोगों के साथ बेहतर संवाद के लिए जरूरी है. इस फैसले को लेकर ऑटो और टैक्सी यूनियनों का भी समर्थन सामने आया है. यूनियनों के प्रतिनिधियों ने सरकार के इस कदम को सही बताया और इसे लागू करने में सहयोग देने की बात कही है.

मीरा-भयंदर अभियान से मिले संकेत

हाल ही में मीरा-भयंदर क्षेत्र में इसी तरह का एक विशेष अभियान चलाया गया था, जिसके नतीजे चौंकाने वाले रहे. जांच के दौरान कुल 3,443 ऑटो-रिक्शा की जांच की गई, जिनमें से 565 चालक मराठी भाषा में संवाद करने में सक्षम नहीं पाए गए. हालांकि, राहत की बात यह रही कि इन चालकों ने मराठी सीखने में रुचि दिखाई. इससे यह संकेत मिलता है कि अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो लोग नई भाषा सीखने के लिए तैयार हैं.

चालकों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था

सरकार ने इस पहल को केवल जांच तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि चालकों को मराठी सिखाने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं. आरटीओ कार्यालयों में ऐसे चालकों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जो मराठी सीखना चाहते हैं. इस कार्य में कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ जैसी संस्थाएं सहयोग करेंगी. इन संस्थाओं के माध्यम से चालकों को भाषा सीखने में मदद दी जाएगी. इसके अलावा, उन्हें आसान भाषा में तैयार की गई बुकलेट्स भी दी जाएंगी, ताकि वे अपने समय के अनुसार अभ्यास कर सकें.

प्रशिक्षण के बाद मिलेगा प्रमाण पत्र

जो चालक इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, उन्हें राज्य सरकार की ओर से एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा. यह प्रमाण पत्र भविष्य में लाइसेंस के नवीनीकरण के समय आवश्यक होगा. इस कदम से न केवल भाषा सीखने को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चालक स्थानीय लोगों से आसानी से संवाद कर सकें और बेहतर सेवा दे सकें.

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