पश्चिम बंगाल चुनाव: अंतिम चरण के मतदान में भाजपा-TMC के बीच 'करो या मरो' की सीधी टक्कर
पश्चिम बंगाल में आज अंतिम चरण का मतदान जारी है, जहां टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है. यह चरण दोनों दलों के लिए निर्णायक माना जा रहा है, जो राज्य की सत्ता की दिशा तय करेगा.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में जारी सियासी संग्राम अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. बुधवार को दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के साथ चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने जा रही है, जहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है.
सुबह 7 बजे से शुरू हुए मतदान में 294 में से 142 सीटों पर वोटिंग हो रही है. जहां एक ओर टीएमसी अपनी सत्ता बचाने की कोशिश में जुटी है, वहीं भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत झोंक रही है.
मतदान की शुरुआत और उत्साह
दूसरे चरण की वोटिंग शुरू होते ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं. पहले चरण में 93.17 प्रतिशत के रिकॉर्ड मतदान के बाद इस बार भी भारी संख्या में मतदाताओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
पहले चरण का असर
राज्य में 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हुआ था, जिसमें उत्तर बंगाल के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डाले गए. यह स्वतंत्रता के बाद सबसे अधिक मतदान रहा, जिसने टीएमसी और भाजपा दोनों को बढ़त का दावा करने का मौका दिया.
दक्षिण बंगाल पर टिकी नजरें
अंतिम चरण में दक्षिण बंगाल में मतदान हो रहा है, जो पिछले 15 वर्षों से टीएमसी का मजबूत गढ़ रहा है. भाजपा यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. 2021 के चुनाव में भाजपा को इस क्षेत्र की 77 सीटों में से केवल 18 सीटें ही मिली थीं, जिससे यह इलाका टीएमसी की सत्ता में वापसी का मुख्य कारण बना था.
प्रचार में झोंकी पूरी ताकत
दक्षिण बंगाल में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को यहां चुनाव प्रचार में उतारा गया.
प्रमुख चुनावी मुकाबले
इस चरण का सबसे चर्चित मुकाबला भाबानीपुर सीट पर है, जहां भाजपा के सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनौती दे रहे हैं. इसे "सभी चुनावी मुकाबलों की जननी" कहा जा रहा है और इसे नंदीग्राम के मुकाबले का पुनरावृत्ति माना जा रहा है.
टॉलीगंज में टीएमसी के अरूप बिस्वास का मुकाबला भाजपा की उम्मीदवार पापिया अधिकारी से है. बिधाननगर में टीएमसी के सुजीत बोस बहुकोणीय मुकाबले में चुनाव लड़ रहे हैं, जहां भाजपा के शरदवत मुखर्जी भी मैदान में हैं. पनिहाटी में टीएमसी के तीर्थंकर घोष और भाजपा की रत्ना देबनाथ आमने-सामने हैं. कोलकाता पोर्ट सीट पर फिरहाद हकीम भाजपा के राकेश सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. नोआपारा में भाजपा के अर्जुन सिंह और टीएमसी के त्रिनांकुर भट्टाचार्य के बीच मुकाबला है.
मतदाता सूची विवाद बना मुद्दा
इस चरण में मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) एक बड़ा विवाद बनकर उभरा है. उत्तर 24 परगना में 12.6 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जबकि दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख नाम सूची से बाहर किए गए.
कोलकाता में लगभग 6.97 लाख, हावड़ा में करीब 6 लाख, हुगली में 4.68 लाख और नादिया में करीब 4.85 लाख नाम हटाए गए हैं. करीब 25 सीटों पर हटाए गए नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से भी अधिक है, जिससे चुनाव परिणामों पर इसका प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
हिंसा की आशंका बरकरार
राज्य में राजनीतिक हिंसा को लेकर चिंता बनी हुई है. दक्षिण 24 परगना में एक टीएमसी कार्यकर्ता के घर से कच्चे बम बरामद होने और पहले चरण में हुई हिंसा की घटनाओं ने तनाव बढ़ा दिया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मतदान के बाद केंद्रीय सशस्त्र बल 60 दिनों तक राज्य में तैनात रहेंगे. टीएमसी ने इस बयान को "डर फैलाने" वाला बताया है.
निर्णायक मोड़ पर चुनाव
भाजपा के लिए यह चरण सत्ता परिवर्तन की दिशा में अंतिम परीक्षा है, जहां वह सत्ता विरोधी माहौल और अन्य मुद्दों के सहारे टीएमसी के गढ़ को चुनौती दे रही है. वहीं, टीएमसी के लिए दक्षिण बंगाल में पकड़ बनाए रखना चौथी बार सत्ता में वापसी की कुंजी है.
नतीजों का इंतजार
बुधवार शाम तक मतदान प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, लेकिन असली तस्वीर 4 मई को सामने आएगी, जब यह स्पष्ट होगा कि भाजपा ने अपनी पकड़ को पूरे राज्य में विस्तार दिया या ममता बनर्जी ने एक बार फिर दक्षिण बंगाल में अपना वर्चस्व कायम रखते हुए सत्ता बरकरार रखी.


