मुंबई: शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा, शिंदे गुट और दल-बदल करने वाले नेताओं पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को किसी के आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए, क्योंकि बालासाहेब ठाकरे ने पहले ही गद्दारों के खिलाफ रुख साफ कर दिया था। उसी दौरान उद्धव ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर पार्टी को लगता है कि वह शिवसेना प्रमुख पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह पद छोड़ने को तैयार हैं।
उद्धव ने कहा कि वह संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं, लेकिन अगर कार्यकर्ताओं और नेताओं को लगे कि वह इस जिम्मेदारी के लायक नहीं हैं तो वह तुरंत पद छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी के हित में किसी भी योग्य व्यक्ति को शिवसेना अध्यक्ष बना दिया जाए।
उन्होंने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि शिवसेना के टूटने और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है। चाहे हालात कैसे भी हों, वह हार मानने वाले नहीं हैं।
उद्धव ने कहा कि इन दिनों बालासाहेब का एक पुराना भाषण वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने गद्दारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही थी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राजनीतिक तोड़फोड़ इसी तरह चलती रही तो ऑपरेशन कमल का जवाब ऑपरेशन तोड़वा से दिया जाएगा। उनका आरोप था कि देश अराजकता की तरफ बढ़ रहा है और विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने तक नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि अगर यही रवैया रहा तो भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। युवाओं को हल्के में न लेने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई भी युवाओं ने लड़ी थी और आज भी वे बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
उद्धव ने पार्टी छोड़कर जाने वाले सांसदों और विधायकों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और किसानों ने मेहनत कर उन्हें जिताया, लेकिन वे जीतकर चले गए। अब जनता को उनसे हिसाब मांगना चाहिए। कांग्रेस के साथ गठबंधन पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि शिवसेना 30 साल तक भाजपा के साथ रही लेकिन उसमें विलय नहीं हुआ, तो कांग्रेस में विलय का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना का समर्थन न मिलता तो भाजपा बहुत पहले खत्म हो जाती। उद्धव ने साफ किया कि शिवसेना किसी में विलय के लिए नहीं बनी थी। इसका मकसद मराठी लोगों के हक और हिंदुत्व की रक्षा करना था। First Updated : Friday, 19 June 2026