नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह असामान्य रूप से नाराज दिखाई दिए. अपनी बात रखते हुए जब किसी विपक्षी सदस्य ने बीच में टिप्पणी कर दी, तो राजनाथ सिंह ने कड़े लहजे में आपत्ति जताई और सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी. उन्होंने साफ कहा कि संसद में किसी को बोलना है तो अपनी बारी का इंतजार करे, लेकिन शोर-शराबा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
रक्षा मंत्री ने कहा कि वह हमेशा सदन की मर्यादा का सम्मान करते आए हैं और सभी सदस्यों को भी यही परंपरा निभानी चाहिए. उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे सच बोलें या सत्य से थोड़ा परे, लेकिन शांति और अनुशासन बने रहना चाहिए. इस दौरान उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को लेकर कई ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख किया और इसके महत्व पर जोर दिया.
राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ ने देश में स्वतंत्रता की ज्वाला जगाने में निर्णायक भूमिका निभाई और ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी. उन्होंने बताया कि यह सिर्फ बंगाल के स्वदेशी आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को ऊर्जा देने वाला गीत बना. उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में ‘वंदे मातरम समिति’ भी बनाई गई थी. सन 1906 में जब भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज बना, तो उसके बीच में ‘वंदे मातरम’ अंकित था. यहां तक कि उस समय ‘वंदे मातरम’ नाम से अखबार भी प्रकाशित होता था.
रक्षा मंत्री ने सदन में कहा कि ‘वंदे मातरम’ को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार था. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वंदे मातरम के साथ इतिहास ने बड़ा छल किया है. उनका मानना है कि जहां ‘जन-गण-मन’ राष्ट्रीय भावना में पूरी तरह समा गया, वहीं ‘वंदे मातरम’ को जानबूझकर दबाया गया. राजनाथ सिंह ने कहा कि इन सभी कोशिशों के बावजूद यह गीत करोड़ों भारतीयों की आत्मा में आज भी जीवित है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे अपूर्ण साबित करने की कोशिशें बार-बार हुईं, लेकिन इसका महत्व कभी कम नहीं हुआ.
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि देश की युवा पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि ‘वंदे मातरम’ के साथ किन परिस्थितियों में अन्याय हुआ. उन्होंने कहा कि जन-गण-मन और वंदे मातरम भारत माता की दो आंखें हैं. वंदे मातरम राजनीतिक नहीं है. उन्होंने बताया कि इस चर्चा का उद्देश्य राजनीतिक बहस छेड़ना नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक अन्याय को सामने लाना है जो सिर्फ एक गीत के साथ नहीं, बल्कि आजाद भारत की जनता के साथ हुआ था. उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है कि ‘वंदे मातरम’ की गरिमा को फिर से स्थापित किया जाए.
First Updated : Tuesday, 09 December 2025