नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार अब पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई के मूड में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात कहने के बाद सरकार ने इस मामले को मिशन मोड में लेना शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, अब आरोपियों पर सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इसके साथ ही मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी तैयारी शुरू हो गई है.
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों और हाई कोर्ट से विशेष अदालतें गठित करने का अनुरोध करेगी. इन अदालतों में NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई होगी, ताकि जांच और ट्रायल में देरी न हो और दोषियों को जल्द सजा मिल सके.
यह कानून 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू है. इसका उद्देश्य पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए होने वाली परीक्षा में धांधली और अन्य अनुचित तरीकों पर सख्त रोक लगाना है. इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर जेल के साथ भारी जुर्माने का भी प्रावधान है.
बता दें, यह अधिनियम UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), IBPS और केंद्र सरकार की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के अलावा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित सभी प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं पर लागू होता है. NEET परीक्षा भी NTA कराती है, इसलिए इससे जुड़े पेपर लीक और गड़बड़ियों के मामलों में भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.
अब तक इस कानून के तहत NEET पेपर लीक से जुड़े चार मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इनकी सुनवाई के लिए दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. इनमें से दो मामले बॉम्बे हाई कोर्ट के दायरे में आते हैं. सरकार का मानना है कि विशेष अदालतों के बनने से मामलों का तेजी से निपटारा होगा, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा. इसके साथ ही भविष्य में पेपर लीक और संगठित नकल जैसे मामलों पर भी प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी. First Updated : Thursday, 23 July 2026