ममता बनर्जी को कोर्ट का झटका, बंगाल विधानसभा के नए नेता विपक्ष होंगे ऋतब्रत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को कलकत्ता हाई कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है. हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथिन बसु के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी घमासान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेतृत्व को कलकत्ता हाई कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है. विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) पद को लेकर छिड़े कानूनी विवाद में हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथिन बसु के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत के इस आदेश के बाद बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर बने रहेंगे.

अंतरिम रोक का कोई ठोस आधार नहीं

जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की दलीलों में ऐसा कोई ठोस मामला या सुविधा का संतुलन नहीं दिखा. जिसके आधार पर स्पीकर के फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए. कोर्ट ने अंतरिम स्थगन आदेश देने से मना करते हुए सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने विस्तृत हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई 2026 को मुकर्रर की गई है.

रोक लगाने की मांग

यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब ममता बनर्जी के बेहद करीबी और वरिष्ठ टीएमसी विधायक शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्पीकर द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी और इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उठाए तीखे सवाल

भले ही अदालत ने स्पीकर के फैसले पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने विधानसभा अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने स्पीकर की ओर से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल बिलवदल भट्टाचार्य से पूछा कि आखिर 9 मई को टीएमसी नेतृत्व द्वारा शोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने के लिए भेजे गए पहले पत्र पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

ऋतब्रत बनर्जी विपक्ष का नेता घोषित किया

अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि आधिकारिक पार्टी के आवेदन को तो ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, लेकिन 3 जून को बागी गुट की तरफ से मिले दूसरे पत्र पर तत्परता दिखाते हुए ऋतब्रत बनर्जी को तुरंत विपक्ष का नेता घोषित कर दिया गया. कोर्ट ने पूछा कि इस भेदभावपूर्ण फैसले के पीछे स्पीकर के पास क्या तार्किक स्पष्टीकरण है?

चुनावी हार के बाद TMC में ऐतिहासिक बगावत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर आंतरिक कलह चरम पर पहुंच गई और विधायक दल दो धड़ों में बंट गई. पार्टी आलाकमान ने अनुभवी नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय को नेता मनोनीत किया था. लेकिन, पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर ऋतब्रत बनर्जी ने कुल 80 में से 58 विधायकों का भारी समर्थन हासिल कर लिया, जो दलबदल कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई के आंकड़े से अधिक है.

विधायकों ने क्या आरोप लगाया

इससे पहले, 1 जून को ही टीएमसी लीडरशिप ने ऋतब्रत को 'पार्टी-विरोधी गतिविधियों' के आरोप में निष्कासित कर दिया था. इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब टीएमसी के कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि शोवनदेब के समर्थन वाले आधिकारिक दस्तावेज पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे. यह पूरा मामला अब सीआईडी (CID) जांच के दायरे में है, जिसमें ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की भूमिका की भी जांच की जा रही है. First Updated : Thursday, 18 June 2026