पासपोर्ट है ट्रैवल डॉक्यूमेंट, नागरिकता का सबूत नहीं; विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज है. इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. नागरिकता तय करने के लिए कानून के तहत जन्म तिथि, माता-पिता की नागरिकता और अन्य कानूनी दस्तावेजों को भी देखा जाता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्ली: पासपोर्ट को अक्सर भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण माना जाता है, लेकिन विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट का मूल उद्देश्य यात्रा दस्तावेज के रूप में काम करना है, न कि नागरिकता के अंतिम प्रमाण के तौर पर. मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में उपलब्ध दस्तावेजों और निर्धारित नियमों के आधार पर पहचान और अन्य जानकारियों की जांच की जाती है, लेकिन नागरिकता से जुड़े कानूनी प्रावधान अलग हैं.

अधिकारी ने क्या जानकारी दी?  

अधिकारी ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 के दौरान देशभर में लगभग 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं. इनमें से करीब 1.39 करोड़ केवल पासपोर्ट जारी करने से संबंधित थीं. उन्होंने बताया कि पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया को छोड़ दिया जाए तो सामान्य परिस्थितियों में पासपोर्ट जारी होने में लगभग छह कार्यदिवस लगते हैं. वहीं पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) में आवेदकों की प्रक्रिया 45 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, देश में वर्तमान समय में 545 पासपोर्ट केंद्र संचालित हैं, जबकि लगभग एक दशक पहले इनकी संख्या केवल 77 थी. इस प्रकार पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. मंत्रालय ने बताया कि पिछले वर्ष 10 नए डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र शुरू किए गए थे और इसी वर्ष 10 अतिरिक्त केंद्र खोलने की योजना है.

अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुविधाओं को लेकर भी मंत्रालय ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए. वर्तमान में 27 देश भारतीय नागरिकों को वीजा-मुक्त प्रवेश की अनुमति देते हैं, जबकि 47 देशों में भारतीय यात्रियों को ‘वीजा ऑन अराइवल’ की सुविधा मिलती है. इसके अलावा 66 देश भारतीय पासपोर्ट धारकों को ई-वीजा उपलब्ध कराते हैं. मंत्रालय का कहना है कि विभिन्न देशों के साथ किए गए मोबिलिटी समझौते छात्रों, शोधकर्ताओं, पर्यटकों और व्यापारियों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद कर रहे हैं.

हालांकि नागरिकता के सवाल पर कानून अलग दृष्टिकोण अपनाता है. भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार, 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति केवल जन्म के आधार पर स्वतः भारतीय नागरिक नहीं माना जाएगा. उसके लिए यह आवश्यक है कि उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो.

कानूनी विशेषज्ञों का क्या कहना है?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकता साबित करने के मामलों में केवल पासपोर्ट, आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र पर्याप्त नहीं हो सकते. ऐसे मामलों में माता-पिता की नागरिकता और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाती है. इसलिए पासपोर्ट को यात्रा का महत्वपूर्ण दस्तावेज तो माना जा सकता है, लेकिन नागरिकता का अंतिम और एकमात्र प्रमाण नहीं.

Topics

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो