न्यूक्लियर मास्टरस्ट्रोक से बदली तस्वीर, भारत ने ऊर्जा की दौड़ में मारी बाज़ी, दुनिया के ताकतवर देशों को दिया सीधा संदेश
भारत ने परमाणु उर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है. ये देश के उर्जा भविष्य को बदल सकता है.

तमिलनाडु के कलपक्कम में बड़ा कदम उठाया गया है। यहां प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल की। यह परमाणु ऊर्जा का अहम पड़ाव है। इसका मतलब है कि रिएक्टर अब खुद से चलने वाली चेन रिएक्शन कर सकता है। यह भारत की न्यूक्लियर यात्रा में नई शुरुआत है। देश अब दूसरे चरण में पहुंच गया है।
क्या क्रिटिकलिटी का मतलब क्या?
क्रिटिकलिटी सुनने में डरावना लग सकता है। लेकिन परमाणु विज्ञान में यह सफलता का संकेत है। इसका मतलब है कि रिएक्टर स्थिर तरीके से काम कर रहा है। यह बिजली उत्पादन से पहले का जरूरी चरण है। इसे ऐसे समझें जैसे इंजन पहली बार खुद से चालू हो गया हो। यह तकनीकी सफलता का बड़ा प्रमाण है।
क्या इस रिएक्टर में खास क्या?
यह रिएक्टर आम रिएक्टर से अलग है। यह जितना ईंधन जलाता है उससे ज्यादा बनाता है। इसी वजह से इसे ब्रीडर रिएक्टर कहा जाता है। इसकी क्षमता 500 मेगावाट है। इसमें लिक्विड सोडियम कूलेंट का इस्तेमाल होता है। यह यूरेनियम और प्लूटोनियम पर चलता है। यह तकनीक भारत को आत्मनिर्भर बना सकती है।
क्या भाभा का सपना कैसे पूरा?
वैज्ञानिक होमी भाभा ने तीन चरणों की योजना बनाई थी। यह उसी का हिस्सा है। पहले चरण में यूरेनियम से बिजली बनती है। दूसरे चरण में प्लूटोनियम का इस्तेमाल होता है। तीसरे चरण में थोरियम का लक्ष्य है। अब भारत दूसरे चरण में पहुंच गया है। यह छह दशक पुराना सपना था।
क्या थोरियम क्यों अहम है?
भारत के पास थोरियम का बड़ा भंडार है। यह देश के लिए रणनीतिक ताकत है। थोरियम सीधे इस्तेमाल नहीं होता। लेकिन यह रिएक्टर उसे उपयोगी ईंधन में बदलता है। इससे भारत को यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम होगी। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। यह भविष्य की ऊर्जा का आधार बन सकता है।
क्या देरी के बाद मिला बड़ा नतीजा?
इस प्रोजेक्ट में काफी देरी हुई। लागत भी बढ़ गई थी। लेकिन आखिरकार सफलता मिल गई। कई सालों की मेहनत रंग लाई। सरकार और वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर यह मुकाम हासिल किया। यह भारत के विज्ञान की बड़ी जीत है।
क्या आगे क्या होगा अब?
अब अगला कदम बिजली उत्पादन है। पहले कम पावर पर टेस्ट होंगे। फिर धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए मंजूरी जरूरी होगी। बाद में इसे ग्रिड से जोड़ा जाएगा। आगे और रिएक्टर बनाने की योजना है। भारत अब परमाणु ऊर्जा में दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो सकता है।


