पाकिस्तान से आए नागरिकों की भारत से वापसी में मंगलवार को अटारी सीमा पर उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. यह बढ़ोतरी केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को जारी वीज़ा रद्द करने के फैसले के बाद देखने को मिली. विशेष रूप से मेडिकल वीज़ा की वैधता की अंतिम तिथि 29 अप्रैल थी, जिस कारण कई लोग इसी दिन सीमा पार लौटे. सरकार के निर्णय की पृष्ठभूमि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकवादी हमले से जुड़ी है, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी. यह घटना 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे घातक मानी जा रही है.
इस कदम से प्रभावित हुए पाकिस्तानी नागरिकों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए भारत सरकार से अपील की कि मानवीय और पारिवारिक मामलों पर पुनर्विचार किया जाए. कई पाकिस्तानी नागरिक लंबे समय से भारत में रह रहे थे और कुछ की शादी भी यहीं हुई थी.
एक पाकिस्तानी नागरिक समरीन ने बताया, "मैं सितंबर में 45 दिन के वीजा पर आई थी और यहीं शादी की. लेकिन अब मेरे पास लंबी अवधि का वीजा नहीं है और मुझे अचानक लौटने के लिए कहा गया है. हम आतंकवादी नहीं हैं, फिर सज़ा क्यों दी जा रही है?" दिल्ली में दस साल पहले शादी करने वाली इरा नाम की महिला ने कहा कि वह NORI वीजा धारक हैं और कोविड के दौरान उनका वीजा समाप्त हो गया था. अब उन्हें भी देश छोड़ने को कहा गया है, जो उन्हें अनुचित लगता है. वहीं, कृष्ण कुमार नामक नागरिक ने कहा कि वह पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और अब लौट रहे हैं. उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की अपील की और कहा कि परिवार दो हिस्सों में बंटे हुए हैं. कुछ भारत में हैं और कुछ पाकिस्तान में.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 27 अप्रैल से सभी पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी सामान्य वीजा सस्पेंड कर दिए गए हैं. केवल मेडिकल वीजा को 29 अप्रैल तक वैध रखा गया था. प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण पाल ने बताया कि पिछले तीन दिनों में अटारी सीमा के ज़रिए 537 पाकिस्तानी नागरिक भारत छोड़ चुके हैं, जबकि 850 भारतीय नागरिक पाकिस्तान से लौटे हैं. अकेले रविवार को 237 पाकिस्तानी लौटे, वहीं 116 भारतीय वापस आए.
First Updated : Tuesday, 29 April 2025