पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी की बड़ी बैठक, राज्यों संग होगी रणनीति तय

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर देश की तैयारियों और समन्वय की समीक्षा करेंगे. सरकार का फोकस नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने और कूटनीतिक प्रयासों से संकट के प्रभाव को कम करने पर है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और इसी परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार ने देश की तैयारियों की व्यापक समीक्षा तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम बैठक करने जा रहे हैं. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा हालात में देश की रणनीति, संसाधनों और समन्वय की स्थिति का आकलन करना होगा. साथ ही “टीम इंडिया” की भावना के तहत केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा.

चुनाव प्रस्तावित राज्यों के सीएम नहीं होंगे शामिल 

हालांकि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, वहां लागू आचार संहिता के कारण उनके मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे. इन राज्यों के प्रशासनिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए जल्द ही मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक आयोजित की जाएगी. उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में चुनाव होने हैं. इनमें केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान संपन्न होगा और सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे.

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की थी. इस बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके भारत पर संभावित प्रभावों का गहन विश्लेषण किया गया. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि देशवासियों को इस संघर्ष के असर से सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा

बैठक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव को कम करने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. खासतौर पर किसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, आयात के स्रोतों को विविध बनाने और नए निर्यात बाजार तलाशने जैसे कदमों पर विचार किया गया. साथ ही बिजली उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि देश में किसी भी प्रकार की बिजली कमी न होने दी जाए.

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नागरिकों को सुरक्षित रखने और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने संसद में अपने संबोधन के दौरान भी संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की भारत की नीति को दोहराया.

इसके अलावा, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है और यहां की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. इसके बावजूद भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रही है ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और देश में तेल-गैस की आपूर्ति सुचारू बनी रहे.

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