नई दिल्लीः लोकसभा में जारी बजट सत्र के बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए. संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर दबाव में हस्ताक्षर कर चुके हैं और अब उनकी छवि को लेकर डर का माहौल है. यह बयान तब आया जब सदन में उन्हें बोलने से रोका गया था, क्योंकि उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के हवाले से चीन मुद्दा उठाया था.
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने लगातार दूसरे दिन चीन सीमा विवाद पर सवाल उठाने की कोशिश की. लोकसभा स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें रोका, क्योंकि अप्रकाशित संस्मरण के उद्धरण सदन की मर्यादा के खिलाफ माने गए. इससे नाराज राहुल गांधी सदन के बाहर आए और पत्रकारों से खुलासा किया. उन्होंने कहा कि पहली बार विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के भाषण पर बोलने नहीं दिया गया, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है.
राहुल गांधी ने दावा किया कि पिछले कई महीनों से अटका भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सोमवार रात अचानक साइन हो गया. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी जी घबराए हुए हैं. उन पर बहुत दबाव है. उनकी छवि खराब हो सकती है. राहुल गांधी ने इसे पीएम की 'साख' खराब होने से जोड़ा और आरोप लगाया कि समझौते में देश की मेहनत और हितों को बेच दिया गया. उन्होंने कहा कि पीएम अब डरे हुए हैं क्योंकि उनकी छवि बनाने वाले लोग अब उसे तोड़ रहे हैं.
राहुल ने दो मुख्य दबाव बिंदुओं का हवाला दिया. पहला, अमेरिका में गौतम अडानी पर चल रहा केस, जिसे उन्होंने पीएम मोदी पर ही केस बताया. दूसरा, एपस्टीन फाइल्स में पीएम का जिक्र, जिसमें अभी और सामग्री जारी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि इन दोनों वजहों से दबाव है और देश को इसे समझना चाहिए. गांधी ने दावा किया कि अमेरिका में अदानी केस असल में मोदी पर है और एपस्टीन फाइल्स में और भी खुलासे बाकी हैं.
विदेश मंत्रालय ने पहले ही एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी के जिक्र को निराधार बताया था. एक बयान में कहा गया कि 2017 में इजराइल की आधिकारिक यात्रा का उल्लेख है, लेकिन बाकी आरोप बेबुनियाद हैं. सरकार ने इन दावों को खारिज किया और कहा कि यह एक दोषी व्यक्ति की कल्पनाएं हैं.
यह विवाद लोकसभा में नरवणे किताब वाले हंगामे के बाद आया है. कांग्रेस का कहना है कि पीएम दबाव में फैसले ले रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताता है. राहुल गांधी के बयानों ने संसद के बाहर बहस छेड़ दी है, जहां व्यापार समझौते की शर्तें, रूस से तेल खरीद और राष्ट्रीय हितों पर सवाल उठ रहे हैं. देश अब समझौते के पूरे विवरण और इन आरोपों के जवाब का इंतजार कर रहा है. First Updated : Tuesday, 03 February 2026