नई दिल्ली : पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के लिए एक नई सुबह की शुरुआत हो रही है, क्योंकि लगभग एक साल के लंबे इंतजार के बाद राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया है. राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा दी गई इस मंजूरी ने राज्य में फिर से लोकतांत्रिक सरकार के गठन का रास्ता साफ कर दिया है. इसके साथ ही अब मणिपुर में युमनाम की सरकार बनने जा रही है.
लोकतांत्रिक बहाली और राष्ट्रपति शासन का अंत
आपको बता दें कि मणिपुर की सीमावर्ती संवेदनशीलता और पिछले साल की परिस्थितियों के कारण फरवरी 2025 से यहां राष्ट्रपति शासन लागू था. अब, एक साल बाद राज्य में प्रशासनिक कमान वापस चुनी हुई सरकार के हाथों में जाने वाली है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया है. इस प्रतिनिधिमंडल में कुकी-जो बहुल जिलों जैसे चुराचांदपुर और फेरजॉल के विधायकों की मौजूदगी ने राज्य में एकता का एक सकारात्मक संदेश दिया है.
शाम 6 बजे CM पद की शपथ लेंगे
बता दें कि सत्तारूढ़ गठबंधन की कमान अब वाई खेमचंद सिंह के हाथों में होगी, जिन्हें सर्वसम्मति से भाजपा और फिर राजग विधायक दल का नेता चुने गए है. बुधवार, 4 फरवरी 2026 की शाम छह बजे 'लोक भवन' में आयोजित एक भव्य समारोह में वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. राज्य भाजपा का मानना है कि सिंह के अनुभव और दूरदर्शी सोच से मणिपुर में स्थिरता, सुशासन और प्रगति के एक नए अध्याय की शुरुआत होगी. शपथ ग्रहण को लेकर राजधानी में उत्साह का माहौल है और तैयारियां जोरों पर हैं.
विभिन्न समुदायों को एक साथ लाने की कोशिश
इस नई सरकार की सबसे खास बात इसका समावेशी स्वरूप है, जो मणिपुर के विभिन्न समुदायों को एक साथ लाने की कोशिश करता है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले वाई खेमचंद सिंह मेइतेई समुदाय से आते हैं. उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री भी कार्यभार संभालेंगे, जिनमें नेमचा किपगेन कुकी समुदाय का और लोसी दिखो नागा जनजाति का प्रतिनिधित्व करते हैं. कुल पांच विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे. प्रशासन का यह ढांचा राज्य में शांति बहाली और विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
First Updated : Wednesday, 04 February 2026