नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में महंगाई, बिजली बिल और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चल रहा 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' यानी JAAC का आंदोलन अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक विशेष खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना और ISI इस शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलन को कुचलने के लिए बड़ी साजिश रच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरबाद मार्च से पहले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के गुर्गों को प्रदर्शनकारियों की भीड़ में घुसाया जा सकता है।
खुफिया इनपुट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना आम नागरिकों के भेष में आतंकी गुर्गों को प्रदर्शन में शामिल करेगी। ये लोग सुरक्षाबलों पर हमला करेंगे, सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ और आगजनी करेंगे। जैसे ही आंदोलन हिंसक होगा, सेना इसे "राष्ट्र-विरोधी और आतंकी साजिश" बताकर पूरे इलाके में कड़ा मिलिट्री और काउंटर-टेरर ऑपरेशन चलाने का बहाना बना लेगी।
अब तक PoK का ये आंदोलन बिजली की कटौती, आटे पर सब्सिडी, बेतहाशा महंगाई और लोकल गवर्नेंस जैसे आम नागरिक मुद्दों पर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना अब लश्कर-जैश के नेटवर्क को मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर खुली छूट देगी। इसका मकसद आंदोलन के असली मुद्दों को दबाकर वहां "कट्टरपंथी इस्लामिक एजेंडा" और "भारत-विरोधी बयानबाजी" को बढ़ावा देना है। ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस जायज आंदोलन की विश्वसनीयता खत्म की जा सके।
खुफिया रिपोर्ट में दावा है कि सेना सीधे पुलिस या रेंजर्स का इस्तेमाल नहीं करेगी। इसके बजाय लश्कर और जैश के "डिनाइबल नेटवर्क" के जरिए आंदोलन के बड़े नेताओं और सिविल सोसाइटी कार्यकर्ताओं को डराया, अगवा या खत्म किया जाएगा। यदि किसी बड़े नेता की हत्या होती है तो पाकिस्तान इसे "आतंकी गुटों की आपसी रंजिश" बताकर अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश करेगा।
इस पूरी हिंसा का आखिरी मकसद पूरे PoK में बड़े पैमाने पर सेना की तैनाती का बहाना बनाना है। काउंटर टेरर और इमरजेंसी सुरक्षा के नाम पर पाकिस्तान रेंजर्स और फ्रंटियर कोर के जवानों को नागरिक इलाकों में उतारकर पकड़ मजबूत की जाएगी।
ये खुलासा ऐसे वक्त हुआ है जब मुजफ्फरबाद मार्च से पहले ही रावलाकोट और सुधनोती में तनाव चरम पर है। प्रदर्शन रोकने के लिए रेंजर्स की फायरिंग में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। रावलाकोट और मुजफ्फरबाद में जैश के लॉन्च पैड और बुनियादी ढांचे अब भी सक्रिय हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान अब उन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल अपनी ही जनता की आवाज दबाने के लिए कर रहा है। First Updated : Wednesday, 15 July 2026