अस्पतालों में बांटी जा रही थीं नकली दवाएं 4 महिलाओं की मौत के बाद बड़ा खुलासा

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई जिनमें से चार महिलाओं की जान जाने के पीछे नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल होने का गहरा शक है.

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राजस्थान: राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बेहद गंभीर और डरावना मामला सामने आया है. कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई जिनमें से चार महिलाओं की जान जाने के पीछे नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल होने का गहरा शक है.

सैंपल नकली निकली

राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की लैब जांच में इस इंजेक्शन का सैंपल पूरी तरह फेल और नकली पाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस इंजेक्शन में प्रसव के बाद महिलाओं की ब्लीडिंग रोकने वाला मुख्य सक्रिय तत्व ततमौजूद ही नहीं था.

पूरे राज्य में दवा पर लगी रोक

राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि इस जानलेवा लापरवाही के सामने आने के बाद विभाग ने पूरे राज्य में इस दवा की बिक्री और इस्तेमाल पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. सरकारी अस्पतालों और निजी मेडिकल स्टोरों से इस विशिष्ट बैच के स्टॉक को तुरंत जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं.

नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन

जांच में सामने आया है कि इस नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का निर्माण अमृतसर स्थित 'जैक्सन लैबोरेटरीज़' द्वारा किया गया था. स्वास्थ्य विभाग अब इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि यह खतरनाक बैच किन-किन अन्य सप्लाई चैनलों और अस्पतालों तक पहुंचा है.

11 दवाओं के सैंपल हुए फेल

यह संकट सिर्फ एक इंजेक्शन तक सीमित नहीं है. पिछले दस दिनों के भीतर राजस्थान में अलग-अलग बीमारियों की 11 दवाओं के सैंपल लैब जांच में असुरक्षित और घटिया पाए गए हैं. इनमें आम बुखार, गंभीर एलर्जी, एंटीबायोटिक्स, पेट के संक्रमण और इमरजेंसी में दी जाने वाली पेनकिलर दवाएं शामिल हैं.

किन फार्मा कंपनियों में दवाएं जा रही थी

ये फेल दवाएं राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र की विभिन्न फार्मा कंपनियों में मैन्युफैक्चर की जा रही थीं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सप्लाई चेन में दवाओं की ऐसी घटिया गुणवत्ता मरीजों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है जिसके लिए दवा कंपनियों और निगरानी तंत्र दोनों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

लोकल खरीद के नियमों पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने सफाई देते हुए कहा है कि हालांकि ऑक्सीटोसिन दवा जांच में नकली पाई गई है लेकिन केवल इसी को मौतों का एकमात्र कारण मान लेना जल्दबाजी होगी. इस मामले ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया है.

दवाओं का कड़ा रिकॉर्ड

कोटा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल ने यह दवा स्थानीय स्तर पर खरीदी थी. चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य में फिलहाल स्थानीय स्तर पर दवा खरीद के लिए कोई पुख्ता मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) मौजूद नहीं थी. इस हादसे के बाद अब सरकार ने लोकल खरीद के लिए सख्त एसओपी बनाने और मरीजों को दी जाने वाली दवाओं का कड़ा रिकॉर्ड रखने के आदेश दिए हैं. First Updated : Tuesday, 26 May 2026