नेपाल के पीएम बालेन शाह के खिलाफ फूटा Gen-Z का गुस्सा, सड़कों पर उतरकर किया बड़ा विरोध
नेपाल में सत्ता बदलने वाले जेन-जी आंदोलन के बाद अब उसी जेन-जी को PM बालेन शाह के फैसलों के खिलाफ उतरना पड़ा है।

नई दिल्ली: नेपाल में सत्ता बदलने वाले जेन-जी आंदोलन के बाद अब उसी जेन-जी को PM बालेन शाह के फैसलों के खिलाफ उतरना पड़ा है। रविवार को काठमांडू में सैकड़ों लोगों ने भूमिहीन झुग्गीवासियों को वैकल्पिक व्यवस्था के बिना हटाने के सरकार के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा के आह्वान पर सिंहदरबार सचिवालय के सामने मैतीघर मंडला में हुआ।
झुग्गी हटाने के फैसले पर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों के हाथों में "गरीबों पर अत्याचार बंद करो", "मानवाधिकारों का सम्मान करो", "अवैध गिरफ्तारियां बंद करो", "भूमिहीन झुग्गीवासियों को आश्रय दो" जैसी तख्तियां थीं। मुद्दा तब और गर्म हुआ जब शुक्रवार रात कीर्तिपुर में सरकार के एक अस्थायी आवास केंद्र में बाढ़ का पानी भर गया। वहां करीब 150 भूमिहीन झुग्गीवासी रह रहे थे। सुरक्षाबलों ने उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया।
सरकार ने अप्रैल में काठमांडू घाटी समेत देशभर में झुग्गियां हटाईं थीं। इससे 2600 परिवारों के 15,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। इनमें 325 परिवार काठमांडू के अस्थायी केंद्रों में रखे गए थे। सरकार ने 2 जुलाई को इन्हें 6 जुलाई तक खाली करने को कहा था, लेकिन बृहस्पतिवार तक 60 से ज्यादा परिवार वहीं रुके हुए थे।
जेन-जी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज
शनिवार को स्थिति जानने पहुंचे जेन-जी के युवा कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान एक कार्यकर्ता के चेहरे पर चोट आई, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। नेपाली कांग्रेस अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने गिरफ्तारी की निंदा की और तुरंत रिहाई की मांग की।
रविवार को मोरांग जिला पुलिस कार्यालय के सामने धरना दे रहे 26 जेन-जी कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उनका आरोप था कि कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ है।
कैसे सत्ता में आए बालेन शाह?
2025 में शुरू हुआ जेन-जी आंदोलन नेपाल के इतिहास के सबसे बड़े युवा आंदोलनों में से एक था। सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और भाई-भतीजावाद से नाराज युवा सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन हिंसक हुए, सरकारी इमारतें जलीं और पुलिस से झड़पों में दर्जनों लोग मारे गए। दबाव में तत्कालीन PM के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दिया।
इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम PM बनाया गया और नए चुनाव का ऐलान हुआ। इस बीच काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह यानी बालेन शाह युवाओं के बीच हीरो बनकर उभरे। भ्रष्टाचार विरोधी छवि और पारंपरिक दलों के खिलाफ माहौल का फायदा मिला।
मार्च 2026 के चुनाव में उनकी पार्टी को भारी जीत मिली और 27 मार्च 2026 को बालेन शाह PM बन गए। लेकिन सत्ता संभालते ही अब वही युवा वर्ग बालेन सरकार के फैसलों पर सवाल उठा रहा है। जिस आंदोलन ने उन्हें सत्ता दिलाई, उसी की मांगों को लेकर अब उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।


