नागौर: राजस्थान के नागौर जिले में नशा तस्करों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यहां एक आरोपी द्वारा अवैध कमाई से बनाए गए आलीशान मकान को सीज कर दिया गया है, जिसकी कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है.
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने इस संपत्ति को अपनी पहचान छिपाने के लिए अपनी लिव-इन पार्टनर के नाम पर रजिस्टर्ड कर रखा था. पुलिस की गहन जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और कार्रवाई को अंजाम दिया गया.
जानकारी के मुताबिक, सुरपालिया थाना क्षेत्र के जानवा गांव निवासी बहादुर सिंह उर्फ समीर लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था. उस पर स्मैक (हेरोइन) की सप्लाई करने का आरोप है और इसी अवैध कारोबार से उसने मोटी कमाई की थी.
इस काली कमाई से आरोपी ने नागौर के शारदापुरम इलाके में एक महंगा मकान तैयार कराया था.
जांच के दौरान सामने आया कि यह मकान आरोपी के नाम पर नहीं, बल्कि उसकी लिव-इन पार्टनर के नाम पर रजिस्टर्ड था. यह कदम उसने जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के उद्देश्य से उठाया था.
पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले, जिसमें बहादुर सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत दो मामले पहले से दर्ज पाए गए. ये मामले करीब छह साल पुराने थे और एक बीकानेर के पांचू थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ था.
गहराई से जांच करने पर पुलिस को पता चला कि मकान नशे के कारोबार से अर्जित पैसे से बनाया गया था. कुछ रिपोर्ट्स में इसकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक भी बताई गई है.
मजबूत साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने यह मामला दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकरण के सामने पेश किया, जहां से मंजूरी मिलने के बाद मकान को सीज करने की कार्रवाई की गई.
जांच में स्पष्ट हो गया है कि यह संपत्ति अवैध धन से बनाई गई है.मकान पर नोटिस चस्पा करने के कुछ ही समय बाद आरोपी ने उसे हटाने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने गंभीरता से लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस का कहना है कहा कि जिले में नशा तस्करों के खिलाफ सख्त अभियान जारी है. अवैध कमाई से बनी संपत्तियों की पहचान कर उन्हें सीज किया जा रहा है.
पिछले 15 दिनों में चार संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं, जबकि कुल पांच मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है. पुलिस ने साफ किया है कि ऑपरेशन संकल्प के तहत यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. First Updated : Sunday, 12 April 2026