तपती गर्मी के बीच राहत की खबर: इस बार समय से पहले दे सकता है मानसून दस्तक, मई के आखिर तक बारिश के आसार
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स की ताजा भविष्यवाणी ने खुशखबरी दी है. दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्दी दस्तक दे सकता है, जो तेज होती गर्मी से राहत दिलाकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है.

वेदर फोरकास्ट्स की ताजा भविष्यवाणी ने खुशखबरी दी है. दक्षिण-पश्चिम मानसून जल्दी दस्तक दे सकता है, जो तेज होती गर्मी से राहत दिलाकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है.
हालांकि, गर्मी से बेहाल लोगों के लिए राहत की खबर है. वेदर फोरकास्ट के ताजा पूर्वानुमान में संकेत मिले हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार जल्दी आ सकता है. मई के आखिर तक दक्षिण भारत में मानसून की बारिश शुरू हो सकती है. 2025 में भी केरल में मानसून 27 से 29 मई के बीच पहुंचने का अनुमान था, लेकिन यह तय समय से पहले ही आ गया था, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी मानसून समय से पहले पहुंचा था. कई कारक मानसून की प्रगति को प्रभावित करते हैं, लेकिन मौजूदा संकेत फिर से जल्दी आगमन की मजबूत संभावना दिखा रहे हैं.
मानसून सबसे पहले कहां पहुंचेगा?
इस हफ्ते जारी किए गए सब-सीजनल चार्ट के मुताबिक, मानसून 18 से 25 मई के बीच अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पहुंच सकता है. हर साल हिंद महासागर से नमी भरी हवाएं चलकर भारत में बारिश लाती हैं. फिलहाल, मॉडल दक्षिणी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर पर दक्षिण-पश्चिम से तेज हवाएं बनने का संकेत दे रहे हैं. इन हवाओं से उस हफ्ते द्वीपों में 30 से 60 मिमी तक सामान्य से ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है.
अंडमान के उत्तर में एक ट्रॉपिकल सिस्टम बनने की 20-40% तक संभावना भी है. ऐसे सिस्टम अक्सर बूस्टर की तरह काम करते हैं जो ज्यादा नमी खींचते हैं और मानसून सीजन की शुरुआत में मदद करते हैं. अगले हफ्ते, 25 मई से 1 जून के बीच, मानसून की हलचल पश्चिम और उत्तर की ओर बढ़ने का अनुमान है. दक्षिण-पूर्व अरब सागर पर तेज पश्चिमी हवाएं बनने की उम्मीद है, जो नमी को सीधे भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट की ओर ले जाएंगी.
इससे केरल और तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. बारिश पर निर्भर इन क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए जल्दी होने वाली बारिश का मतलब बढ़ती गर्मी से राहत और कृषि गतिविधियों की समय पर शुरुआत होगा. मॉडल इस दौरान केरल तट पर बारिश के बादलों में साफ बढ़ोतरी दिखा रहे हैं.
मानसून के आने का समय क्या तय करेगा?
कई कारक तय करेंगे कि बारिश कब आएगी, पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर के बीच समुद्र की सतह के तापमान में अंतर से चलती है.जब पश्चिमी हिंद महासागर पूर्वी हिस्से की तुलना में गर्म होता है, तो एक सकारात्मक IOD भारतीय उपमहाद्वीप की ओर अधिक नमी लाता है, जिससे आमतौर पर मानसून मजबूत होता है और औसत से ज्यादा बारिश होती है, जबकि नकारात्मक IOD मानसून को कमजोर करता है. साथ ही गर्मी को भी देखना होगा. भारत इस साल की शुरुआत में जो भीषण गर्मी झेल रहा है, वह आने वाले मानसून को तय करने में भूमिका निभाएगी.
जब गर्मी बढ़ती है, तो हिंद महासागर से आने वाली मानसून हवाएं जो आमतौर पर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरती हैं, बहुत पहले आ सकती हैं. इसलिए अगर मई के आखिर के लिए जो अनुमान लगाया गया है, उसमें वायुमंडल या समुद्र में कोई बदलाव नहीं होता है, तो अच्छी संभावना है कि मानसून 25 मई के आसपास आ सकता है, त्रिपाठी ने कहा. अभी के हिसाब से, इस साल भी जल्दी मानसून आने की संभावना है. जहां दक्षिण भारत में लाखों लोगों के रोजमर्रा के जीवन में गर्मी का असर जारी है, अगर मॉडल सही साबित होते हैं, तो दक्षिण भारत के लिए बहुप्रतीक्षित मानसून राहत सामान्य से पहले आ सकती है.


