राज्यसभा में NDA मजबूत, BJP बहुमत के करीब, AAP सांसदों के आने से बदले समीकरण

राज्यसभा में सियासी समीकरण तेजी से बदले हैं. AAP के 7 सांसदों के BJP में शामिल होने से NDA को बड़ी मजबूती मिली है और पार्टी अब बहुमत के बेहद करीब पहुंच गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: राज्यसभा में सियासी गणित अचानक बदलता नजर आ रहा है. आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन NDA को ऊपरी सदन में बड़ी बढ़त मिली है. इस घटनाक्रम ने संसद की ताकत का संतुलन बदल दिया है और आने वाले समय में विधायी प्रक्रिया पर इसका असर साफ दिखाई दे सकता है.

हालांकि, इस बढ़त के बावजूद NDA अभी भी राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत से दूर है. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक गठबंधन की कुल ताकत 145 तक पहुंच गई है, लेकिन 163 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी भी 18 सांसदों की जरूरत है.

AAP सांसदों के आने से NDA को बढ़त

AAP के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद NDA की संख्या बढ़कर 145 हो गई है. राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 244 है, जिसमें दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है.

इस लिहाज से NDA को अभी भी पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है.

संवैधानिक संशोधनों पर पड़ेगा असर

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल होने के बाद NDA के लिए संवैधानिक संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना आसान हो जाएगा.

हालांकि, फिलहाल गठबंधन इस आंकड़े से दूर है. लोकसभा में साधारण बहुमत होने के बावजूद NDA के पास वहां भी दो-तिहाई बहुमत नहीं है. लोकसभा में यह आंकड़ा 363 सांसदों का है, जो अभी NDA के पास नहीं है.

यही वजह रही कि हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़ा अहम विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका.

BJP की संख्या में बड़ा इजाफा

AAP के सात सांसदों के शामिल होने के बाद बीजेपी ने विलय के लिए आवेदन कर दिया है. राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन द्वारा मंजूरी मिलने के बाद बीजेपी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 हो जाएगी, जो पहले 106 थी.

इससे बीजेपी की स्थिति और मजबूत होती नजर आ रही है.

साधारण बहुमत से बस एक कदम दूर BJP

राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सांसदों की जरूरत होती है. बीजेपी के पास 113 सदस्य होने के बाद यदि सात नामांकित और दो निर्दलीय सांसदों का समर्थन जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 122 तक पहुंच जाती है.

इस तरह बीजेपी अपने दम पर साधारण बहुमत से महज एक कदम दूर रह जाएगी.

विलय पर क्या बोले राघव चड्ढा

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि संविधान के प्रावधानों के तहत दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने विलय का फैसला लिया है.

उन्होंने कहा, "अगर चेयरमैन इस विलय को मंजूरी देते हैं, तो इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहेगा."

AAP के 10 में से 7 सांसदों का एक साथ आना तकनीकी रूप से विलय की श्रेणी में आता है.

आगे क्या? NDA को आसान हो सकता है रास्ता

इस नए समीकरण के बाद NDA को उम्मीद है कि भविष्य में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है. हालांकि, दो-तिहाई बहुमत से दूरी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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