रेड के दौरान दखल देने पर SC ने ममता बनर्जी को लगाई फटकार, 'ऐसा हस्तक्षेप ठीक नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए इसे उचित नहीं बताया. वहीं, ईडी ने इसे जांच में बाधा बताया है, जबकि ममता ने कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दिया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री के मौके पर पहुंचने और हस्तक्षेप करने को लेकर नाराजगी जताई. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति उचित नहीं मानी जा सकती और इससे जांच प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. 

न्यायालय ने क्या सवाल उठाया?

न्यायालय ने यह सवाल भी उठाया कि ऐसे असाधारण हालात में केंद्रीय एजेंसियों के पास क्या कोई प्रभावी उपाय होना चाहिए. यह मामला उस समय का है जब ईडी ने चुनाव से पहले चुनाव रणनीति से जुड़ी कंपनी I-PAC के दफ्तरों पर छापेमारी की थी. इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंच गई थीं. ED ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि इस तरह का हस्तक्षेप जांच में बाधा डालने के समान है और इसे सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देखा जाना चाहिए.

एजेंसी ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी I-PAC से जुड़े प्रमुख प्रतीक जैन के घर और कार्यालय तक पहुंचीं. ED का दावा है कि वहां से कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे लैपटॉप, मोबाइल फोन और अहम दस्तावेज हटाए गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है. एजेंसी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से जारी रह सके.

ममता बनर्जी ने आरोपों को किया खारिज

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि यह छापेमारी राजनीतिक कारणों से की गई थी और इसके पीछे भाजपा का दबाव था. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया जा रहा है. उनके अनुसार, यह कार्रवाई विपक्ष को दबाने की रणनीति का हिस्सा है.

दूसरी ओर, ईडी ने मुख्यमंत्री के इन दावों को निराधार बताया है. एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई एक कथित कोयला घोटाले से जुड़ी जांच का हिस्सा थी और इसे पूरी तरह उपलब्ध सबूतों के आधार पर अंजाम दिया गया. ED ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानून के तहत निष्पक्ष जांच करना है.

कुल मिलाकर, यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बन गया है. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद इस पर सभी की नजरें टिकी हैं और आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं.

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