न उड़ान का रिकॉर्ड, न ब्लैक बॉक्स, झारखंड विमान हादसे की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

झारखंड में हुई एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की जांच जारी है. शुरुआती जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं था.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

झारखंड के चतरा जिले में हुई एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की जांच जारी है, लेकिन शुरुआती जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं था. यह जानकारी अधिकारियों ने दी है, जिससे हादसे के कारणों की जांच और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

सातों लोगों की मौत 

सोमवार रात रांची से दिल्ली जा रही इस एयर एम्बुलेंस में कुल सात लोग सवार थे, जिनमें एक मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक, दो परिचारक और दो पायलट शामिल थे. दुर्भाग्य से इस हादसे में सभी सातों लोगों की जान चली गई.

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस विमान में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) नहीं था. नागरिक उड्डयन नियमों के तहत 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों में इन उपकरणों का होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इनके अभाव में दुर्घटना के कारणों की सटीक जानकारी जुटाना कठिन हो जाता है. अब जांच एजेंसियां एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्ड, मलबे के परीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर हादसे की वजह जानने की कोशिश कर रही हैं.

मार्ग बदलने का अनुरोध

जानकारी के मुताबिक, खराब मौसम और आंधी-तूफान इस दुर्घटना की संभावित वजह हो सकते हैं. इसी मार्ग पर उड़ान भरने वाली अन्य एयरलाइंस ने भी खराब मौसम की पुष्टि की है. बताया गया है कि एयर एम्बुलेंस ने भी मौसम खराब होने के कारण मार्ग बदलने का अनुरोध किया था. सूत्रों के अनुसार, अन्य विमानों ने जहां बाईं ओर मुड़ने का अनुरोध किया था. वहीं, इस एयर एम्बुलेंस ने दाईं ओर मुड़ने की अनुमति मांगी थी. हालांकि, दुर्घटना का वास्तविक कारण नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा.

जांच में यह भी सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बीचक्राफ्ट सी90 किंग एयर विमान वर्ष 2018 से 2022 तक संचालन में नहीं था. इस विमान का संचालन दिल्ली स्थित रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा था. इस तथ्य की भी जांच की जा रही है कि लंबे समय तक उपयोग में न रहने के बाद विमान की तकनीकी स्थिति क्या थी.

संजय कुमार के परिजनों ने की मुआवजे और न्याय की मांग

इस हादसे में जान गंवाने वाले मरीज संजय कुमार के परिवार ने मुआवजे और न्याय की मांग की है. परिजनों का कहना है कि उनकी हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें हवाई मार्ग से दिल्ली ले जाने की सलाह दी थी. परिवार ने यह भी बताया कि एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था के लिए लगभग 8 लाख रुपये खर्च किए गए थे. अब परिवार हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है.

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