कोलकाता की सड़कों से इंटरनेशनल स्टार तक, जानिए भारतीय कुत्ते अलोका की कहानी जो बना 'ग्लोबल पीस एम्बेसडर'

कोलकाता एयरपोर्ट के आसपास भटकने वाला एक देसी कुत्ता आज अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है. उसकी अनोखी यात्रा, वफादारी और शांति का संदेश लोगों को भावुक कर रहा है, जिसकी कहानी तेजी से वायरल हो रही है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: कई बार जिंदगी ऐसी कहानियां लिखती है, जो किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं लगतीं. कोलकाता एयरपोर्ट के आसपास कभी सड़कों पर घूमने वाला एक साधारण सा आवारा कुत्ता आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है. "अलोका" नाम का यह भारतीय परिया डॉग अपनी वफादारी, शांत स्वभाव और अनोखी पहचान की वजह से दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. उसके माथे पर बना दिल के आकार का प्राकृतिक निशान उसे और भी खास बनाता है. हाल ही में कई देशों की यात्रा पूरी करने के बाद जब अलोका भारत लौटा तो उसका गर्मजोशी से स्वागत किया गया.

अलोका की अनोखी यात्रा की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी. उस समय भिक्खु पन्नाकारा के नेतृत्व में बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह कोलकाता से बोधगया तक लंबी पदयात्रा पर निकला था. यह यात्रा भारत और नेपाल के विभिन्न इलाकों से होकर गुजरने वाली थी और कई महीनों तक चलनी थी. यात्रा शुरू होने के कुछ दिनों बाद यह छोटा कुत्ता भिक्षुओं के समूह के साथ चलने लगा. शुरुआत में किसी ने नहीं सोचा था कि वह अंत तक साथ रहेगा. रास्ते में कई अन्य कुत्ते भी कुछ दूरी तक साथ आए, लेकिन अलोका ने पूरे सफर में भिक्षुओं का साथ नहीं छोड़ा.

112 दिनों तक निभाया साथ

करीब 112 दिनों तक चली इस कठिन यात्रा में अलोका ने अद्भुत धैर्य और वफादारी दिखाई. वह हर दिन भिक्षुओं के साथ चलता रहा और यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन गया. उसकी निष्ठा और समर्पण से प्रभावित होकर भिक्खु पन्नाकारा ने उसे औपचारिक रूप से अपना लिया. इसके बाद अलोका की जिंदगी ने नया मोड़ लिया और वह अपने नए परिवार के साथ अमेरिका पहुंच गया.

अमेरिका से एशिया तक पहुंची पहचान

अमेरिका जाने के बाद भी अलोका का सफर रुका नहीं. उसने कई राज्यों में लंबी यात्राएं कीं और हजारों किलोमीटर का सफर तय किया. इस दौरान वह विभिन्न कार्यक्रमों और शांति यात्राओं का हिस्सा बना. लोगों ने उसके व्यवहार, धैर्य और मिलनसार स्वभाव को खूब सराहा. धीरे-धीरे अलोका केवल एक पालतू कुत्ता नहीं रहा, बल्कि प्रेम, करुणा और भाईचारे का प्रतीक बन गया. इसके बाद उसने श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों की भी यात्रा की, जहां लोगों ने उसे काफी स्नेह दिया. सोशल मीडिया पर भी उसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई.

भारत वापसी पर मिला खास सम्मान

हाल ही में अलोका अपने भिक्षु साथियों के साथ भारत लौटा. दिल्ली पहुंचने पर उसका भव्य स्वागत किया गया. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों ने उसे देखने और उसकी कहानी सुनने में खास रुचि दिखाई. बताया जा रहा है कि भिक्षुओं का यह दल अब भारत में एक नई शांति यात्रा की तैयारी कर रहा है, जिसमें अलोका भी उनके साथ रहेगा.

मेनका गांधी ने की सराहना

पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकारों की समर्थक मेनका गांधी ने भी अलोका की कहानी की प्रशंसा की. उनका मानना है कि यह कहानी लोगों की सोच बदलने की क्षमता रखती है. उन्होंने कहा कि यदि लोग सड़कों पर रहने वाले कुत्तों को केवल आवारा जानवर न मानकर उनमें भी प्रेम, वफादारी और संवेदनशीलता देखें, तो समाज में उनके प्रति व्यवहार काफी सकारात्मक हो सकता है.

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