चुनावी हार के बाद टीएमसी में बगावत के सुर! बागी गुट ने स्पीकर को सौंपा 58 विधायकों का समर्थन पत्र

विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक खींचतान तेज होती नजर आ रही है. कई विधायकों के एक नए प्रस्ताव ने पार्टी के अंदर बदलते समीकरणों और नेतृत्व को लेकर चल रही हलचल को चर्चा में ला दिया है.

calender

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हलचल लगातार बढ़ती जा रही है. चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. बुधवार को विधानसभा परिसर में हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी, जब पार्टी के 58 विधायक एक अहम प्रस्ताव लेकर विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचे. इस कदम को टीएमसी के अंदर चल रहे शक्ति प्रदर्शन और बढ़ते मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है.

बुधवार को टीएमसी के 58 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को एक प्रस्ताव सौंपा. यह प्रस्ताव उन नेताओं के माध्यम से पहुंचाया गया जो हाल के दिनों में पार्टी से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा के संपर्क में बताए जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले विधायकों ने खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद और गुटबाजी की ओर संकेत करता है.

विपक्ष के नेता और मुख्य सचेतक के लिए नए नामों का प्रस्ताव

प्रस्ताव में विधानसभा के भीतर महत्वपूर्ण पदों के लिए नए नाम भी सुझाए गए हैं. जानकारी के मुताबिक, विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बंद्योपाध्याय का नाम आगे बढ़ाया गया है, जबकि मुख्य सचेतक के पद के लिए अखरुजम्मान का प्रस्ताव रखा गया है. अखरुजम्मान राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं और संगठन के भीतर उनका लंबा राजनीतिक अनुभव माना जाता है. इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर नया समीकरण बन रहा है.

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ एक शिकायत से जुड़ी हुई है, जिसने पार्टी के अंदर तनाव बढ़ा दिया. ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के नेता के समर्थन से संबंधित एक प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए हैं.

शिकायत सामने आने के बाद विधानसभा सचिवालय ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच शुरू करवाई. वर्तमान में इस मामले की जांच राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) कर रही है. जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इससे पूरे विवाद की दिशा तय हो सकती है.

निष्कासन के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

विवाद बढ़ने के बीच टीएमसी नेतृत्व ने भी सख्त रुख अपनाया. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा दोनों विधायकों की भूमिका पर सवाल उठाए जाने के बाद ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया. हालांकि निष्कासन के बाद भी दोनों नेताओं की सक्रियता कम नहीं हुई है. उनके समर्थक लगातार राजनीतिक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है.

अभिषेक बनर्जी ने भी सौंपा अलग प्रस्ताव

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी विधानसभा अध्यक्ष को एक अलग प्रस्ताव सौंपा है. इस प्रस्ताव में विपक्ष के नेता के लिए शोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम सुझाया गया है. इसके अलावा मुख्य सचेतक के पद के लिए फिरहाद हकीम के नाम का प्रस्ताव रखा गया है. दोनों प्रस्तावों के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग विचार और गुट सक्रिय हैं. First Updated : Wednesday, 03 June 2026