राज्यसभा के सांसदों को अब अपने कार्यों को और प्रभावी तरीके से करने के लिए नई तकनीक से लैस किया जाएगा. उन्हें स्मार्ट टीवी, स्मार्ट प्रोजेक्टर, पहनने योग्य उपकरण (wearables) और अन्य नवीनतम गैजेट्स प्रदान किए जाएंगे. ये फैसला राज्यसभा के सदस्यों के लिए कंप्यूटर उपकरणों के वित्तीय अधिकार योजना के तहत लिया गया है, जिसके अंतर्गत सांसदों को उनके कार्यों को बेहतर तरीके से करने के लिए कंप्यूटर उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं.
ये योजना 23 मई को हुई एक बैठक में लागू की गई और इसके तहत राज्यसभा के सदस्यों को नए और बेहतरीन उपकरण मिलेंगे, जो उनके कार्यों को और भी आसान और प्रभावी बनाएंगे.
राज्यसभा के सांसदों को कंप्यूटर उपकरण प्राप्त करने के लिए ये योजना वित्तीय अधिकारों के अंतर्गत आती है. इसके तहत, सांसदों को कई कंप्यूटर उपकरण और सॉफ़्टवेयर खरीदने के लिए निम्नलिखित वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है:
वित्तीय अधिकार
2,00,000/- रुपये: अगर सदस्य को राज्यसभा में तीन साल या उससे ज्यादा के लिए चुना/नामित किया जाता है.
1,50,000/- रुपये: अगर सदस्य को राज्यसभा के लिए उपचुनाव में तीन साल या उससे कम की अवधि के लिए चुना/नामित किया जाता है.
1,00,000/- रुपये अतिरिक्त: अगर सदस्य अपनी कार्यकाल की तीन साल की अवधि पूरी कर चुका है, तो उसे एक अतिरिक्त 1,00,000/- रुपये तक का लाभ मिलेगा, बशर्ते कि कार्यकाल में कम से कम छह महीने का समय बचा हो.
राज्यसभा के सांसदों को पहले से ही डेस्कटॉप, लैपटॉप, पेन ड्राइव, प्रिंटर, स्कैनर, UPS और स्मार्टफोन जैसी सुविधाएं मिल रही हैं. अब इन सुविधाओं में कुछ नई और तकनीकी गैजेट्स भी जोड़े गए हैं, जैसे कि:
स्मार्ट टीवी और स्मार्ट डिस्प्ले
स्मार्ट प्रोजेक्टर और पोर्टेबल प्रोजेक्टर स्क्रीन
टैबलेट कंप्यूटर और कीबोर्ड
स्मार्ट स्पीकर्स और पहनने योग्य उपकरण (जैसे स्मार्टवॉच)
IT उपकरणों के सहायक सामान/आवश्यक एक्सेसरीज़ जैसे:
एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर
स्पीकर्स
हेडफ़ोन
माइक्रोफोन
वेबकैम
ब्लूटूथ हेडसेट/एयरपॉड्स
सांसदों को इन उपकरणों की खरीद पर रीइंबर्समेंट प्राप्त करने के लिए मूल बिल प्रस्तुत करने होंगे. इसके बाद, उन्हें अपनी खरीदारी के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त होगी.
राज्यसभा के सांसदों को नई और आधुनिक तकनीक से लैस करके उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने में मदद करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है. इस कदम से ना केवल सांसदों के कामकाजी अनुभव में सुधार होगा, बल्कि ये भारत की संसद की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. First Updated : Friday, 30 May 2025