बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियों पर चर्चा तेज

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद टीएमसी में कथित तौर पर विधायकों और सांसदों की नाराजगी बढ़ने की खबरें सामने आई हैं, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक संकट की चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच ममता बनर्जी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच हुई मुलाकातों के बाद टीएमसी और कांग्रेस के संभावित राजनीतिक सहयोग को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल की खबरों ने जोर पकड़ लिया है. विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कई विधायक और सांसद नेतृत्व से असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस स्थिति ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है.

चुनावी झटके के बाद पार्टी में असंतोष 

रिपोर्टों के अनुसार, चुनावी झटके के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा और कुछ नेताओं ने अलग रुख अपनाना शुरू कर दिया. इसी क्रम में कई विधायकों द्वारा अलग समूह बनाने और नए नेतृत्व की मांग उठाने की चर्चा सामने आई है. कहा जा रहा है कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में अपनी अलग पहचान स्थापित करने की कोशिश भी की है.

सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के कुछ वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी जताई है. कई प्रमुख चेहरों के इस्तीफे और कुछ सांसदों द्वारा दूरी बनाए जाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है. इन घटनाक्रमों को पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.

इसी बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई मुलाकातों ने अटकलों को और हवा दे दी है. बताया जा रहा है कि विपक्षी एकता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बीच बातचीत हुई. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई बैठकों को लेकर राजनीतिक विश्लेषक कई तरह के अनुमान लगा रहे हैं.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के बीच भी मुलाकात हुई, जिसमें दोनों दलों के संबंधों और संभावित सहयोग पर चर्चा की गई. वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की बैठक को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

राजनीतिक भूमिका को लेकर कई प्रस्तावों पर विचार 

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि दोनों दलों के बीच संगठनात्मक सहयोग और राजनीतिक भूमिका को लेकर कई प्रस्तावों पर विचार किया गया. हालांकि, इन चर्चाओं को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. इसलिए इन दावों को फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन घटनाक्रमों का असर न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों की रणनीति पर भी पड़ सकता है. फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे दोनों दलों के रिश्ते किस दिशा में बढ़ते हैं. First Updated : Wednesday, 10 June 2026

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