NCERT किताब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, केंद्र को डोमेन एक्सपर्ट कमेटी बनाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी किताब विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर डोमेन एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का आदेश दिया है, जो इस मुद्दे से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करेगी.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी किताब विवाद से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को एक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि इस समिति में एक पूर्व जज, एक शिक्षाविद् और एक कानून विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा, ताकि इस मामले से जुड़े मुद्दों की गहराई से समीक्षा की जा सके.
अदालत ने यह भी कहा कि समिति का गठन एक सप्ताह के भीतर किया जाए और कानूनी अध्ययन से जुड़ी सामग्री तैयार करने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से भी परामर्श लिया जाए. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका की आलोचना और सुधार से जुड़े पहलुओं पर भी टिप्पणी की.
न्यायपालिका की कमियों पर भी की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि न्यायपालिका में भी किसी अन्य संस्था की तरह कमियां मौजूद हैं और उन पर ध्यान दिलाया जाता है, तो इससे भविष्य के न्यायाधीशों और वकीलों को सीखने में मदद मिल सकती है.
उन्होंने कहा,"यदि न्यायपालिका में किसी भी अन्य संस्थान की तरह कमियां हैं और यदि ऐसी कमियों की ओर संकेत किया जाता है, तो यह भविष्य के न्यायाधीशों और वकीलों की मदद करेगा और वर्तमान में शामिल पक्षों को सुधारात्मक कदम उठाने में सहायता करेगा."
इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा,"एक सप्ताह के भीतर डोमेन विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए और कानूनी अध्ययन पर सामग्री तैयार करने के लिए नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल से भी परामर्श लिया जाए."
पाठ्यक्रम तैयार करने से तीन लोगों को किया बाहर
अदालत ने विवादित कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक के अध्याय को लेकर भी निर्देश जारी किए. कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनसीईआरटी को आदेश दिया कि प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, शिक्षक सुपर्णा दिवाकर और कानूनी शोधकर्ता आलोक प्रसन्ना कुमार को स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने की किसी भी प्रक्रिया से बाहर रखा जाए.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति अदालत के आदेश में बदलाव चाहते हैं तो वे न्यायालय का रुख कर सकते हैं.
पीठ ने कहा,"अगर वे आदेश में संशोधन चाहते हैं तो वे अदालत से संपर्क कर सकते हैं."
सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की आलोचना पर सख्त रुख
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह ऐसे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान करे जो इस मुद्दे पर न्यायपालिका को बदनाम करने का काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए.
सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,"ऐसे लोगों को सबक सिखाना जरूरी है. मैं बतौर CJI ऐसे लोगों को छोड़ने वाला नहीं हूं. न्यायापालिका को बदनाम करने वालों ने अब तक बिना शर्त माफी मांगी या नहीं ये भी देखना होगा."


