ईरान के मिसाइल हमलों में क्लस्टर बम का बढ़ता इस्तेमाल, जानिए क्या हैं ये खतरनाक हथियार

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने इजरायल पर किए जा रहे मिसाइल हमलों में क्लस्टर वॉरहेड का इस्तेमाल बढ़ा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई बैलिस्टिक मिसाइलों में 50 से 80 तक छोटे वॉरहेड लगाए जा रहे हैं, जिससे बड़े इलाके में छोटे-छोटे बम फैल जाते हैं और खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमलों में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 2026 में जारी तनाव के दौरान ईरान अब तक करीब 300 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है, जिनमें लगभग आधी मिसाइलों में क्लस्टर वॉरहेड लगाए गए थे. इससे नागरिक इलाकों में छोटे-छोटे बम फैलने की घटनाएं बढ़ गई हैं.

इजरायली सेना ने भी पुष्टि की है कि हाल के हमलों में क्लस्टर मुनिशन्स का इस्तेमाल लगभग रोजाना किया जा रहा है. इन हमलों में मार्च 2026 के दौरान कम से कम तीन लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है. खास बात यह है कि खोर्रमशहर-4 जैसी मिसाइलों में 50 से 80 छोटे सबमुनिशन्स तक लगाए जा सकते हैं, जो बड़े इलाके में फैल जाते हैं.

क्लस्टर बम क्या होते हैं?

क्लस्टर बम ऐसे हथियार होते हैं जो हवा में फटने के बाद दर्जनों या सैकड़ों छोटे बमों को अलग-अलग दिशाओं में फैला देते हैं. इन छोटे बमों को सबमुनिशन्स कहा जाता है, जो जमीन पर गिरकर विस्फोट करते हैं और बड़े क्षेत्र में नुकसान पहुंचाते हैं.

इन हथियारों को वाइड एरिया डिस्पर्सल वेपन्स भी कहा जाता है क्योंकि ये एक साथ कई लक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं. ईरान की मिसाइलों में इस्तेमाल किए गए सबमुनिशन्स का वजन लगभग 2.5 किलोग्राम या उससे अधिक बताया गया है और इनमें छोटे रॉकेट जैसी विस्फोटक क्षमता होती है.

क्लस्टर बम कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे विस्फोटक, आग लगाने वाले या एंटी-टैंक. हालांकि ईरानी मिसाइलों में ज्यादातर विस्फोटक प्रकार के सबमुनिशन्स बताए गए हैं. दुनिया के 120 से अधिक देशों ने इन हथियारों पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन ईरान और इजरायल ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

क्लस्टर बम कैसे काम करते हैं?

क्लस्टर बम आमतौर पर किसी बड़ी मिसाइल या बम के अंदर रखे जाते हैं. जब मिसाइल अपने लक्ष्य के करीब पहुंचती है तो उसका वॉरहेड हवा में, लगभग 7 से 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर फट जाता है. इसके बाद छोटे-छोटे बम बाहर निकलकर बड़े इलाके में फैल जाते हैं और गुरुत्वाकर्षण के कारण जमीन पर गिरते ही विस्फोट करते हैं.

खोर्रमशहर-4, सेज्जिल-2, एमाद और गद्र जैसी ईरानी मिसाइलें अब क्लस्टर वॉरहेड ले जाने में सक्षम बताई जाती हैं. इनमें 50 से 80 तक सबमुनिशन्स भरे जा सकते हैं. वॉरहेड में एक विशेष कंटेनर होता है जिसमें दर्जनों छोटे बम पैक रहते हैं और निर्धारित ऊंचाई पर यह कंटेनर खुल जाता है.

मिसाइल में मौजूद सेंसर या टाइमर तय ऊंचाई पर वॉरहेड को सक्रिय करता है. इसके बाद सबमुनिशन्स बिना किसी नियंत्रण के चारों तरफ फैल जाते हैं. कई बार तकनीकी कारणों से कुछ बम फटते नहीं हैं और लंबे समय तक खतरा बने रहते हैं. 2026 के हमलों में इन बमों को बिना गाइडेंस के इस्तेमाल किया गया, जिससे वे और ज्यादा अनियंत्रित साबित हुए.

ईरान ने क्लस्टर बम का इस्तेमाल कब किया?

रिपोर्ट्स के अनुसार 19 जून 2025 को ईरान ने इजरायल पर लगभग 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इनमें से कम से कम एक मिसाइल में क्लस्टर वॉरहेड लगा था, जो गुश दान क्षेत्र के ऊपर हवा में फट गया और करीब 20 छोटे बम फैल गए. ये बम लगभग 8 किलोमीटर के इलाके में गिरे थे, जिसमें 89 लोग घायल हुए थे लेकिन किसी की मौत नहीं हुई थी.

मानवाधिकार संगठन अमनेस्टी इंटरनेशनल ने उस समय कहा था कि 2025 के संघर्ष में क्लस्टर मुनिशन्स का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है.

2026 में स्थिति क्यों ज्यादा गंभीर हो गई?

2026 में जारी मौजूदा संघर्ष में इन हथियारों का इस्तेमाल और बढ़ गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अब तक 300 से ज्यादा मिसाइलें दाग चुका है, जिनमें लगभग आधी में क्लस्टर वॉरहेड लगे थे.

मार्च 2026 के हालिया हमलों में एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. 1 मार्च को सेंट्रल इजरायल में सबमुनिशन्स गिरे थे और 9 मार्च को एक और हमला हुआ जिसमें कई जगहों पर इनका असर देखा गया.

इजरायल की होम फ्रंट कमांड ने चेतावनी दी है कि कई बम जमीन पर गिरने के बाद भी नहीं फटे हैं और लोगों से इनसे दूर रहने को कहा गया है. इन हमलों में खोर्रमशहर-4 मिसाइल का विशेष रूप से इस्तेमाल बताया जा रहा है.

क्लस्टर बम इतने खतरनाक क्यों माने जाते हैं?

क्लस्टर बम अपनी अंधाधुंध प्रकृति और लंबे समय तक बने रहने वाले खतरे के कारण बेहद विवादास्पद हथियार माने जाते हैं. एक मिसाइल से निकले छोटे-छोटे बम 10 किलोमीटर तक के इलाके में फैल सकते हैं, जिससे नागरिक और सैन्य दोनों तरह के लक्ष्य प्रभावित होते हैं.

घनी आबादी वाले इलाकों में इनका असर और भी घातक हो जाता है क्योंकि ये सटीक निशाना नहीं लगाते और घरों, सड़कों या अस्पतालों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

सबसे बड़ा खतरा उन बमों से होता है जो जमीन पर गिरने के बाद भी नहीं फटते. ऐसे सबमुनिशन्स लंबे समय तक खतरा बने रहते हैं और सालों बाद भी लोगों की जान ले सकते हैं. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय संगठन इनके इस्तेमाल की आलोचना करते रहे हैं और इन्हें मानवीय संकट बढ़ाने वाला हथियार मानते हैं.

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