भारत की Air Force होगी और मजबूत...फ्रांस से 114 राफेट जेट्स की खरीद को केंद्र से मिली मंजूरी, सीसीएस में लगेगी अंतिम मोहर
भारत ने 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड से मंजूरी दिलाई है. सौदा लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का है और इसमें 12-18 विमान फ्रांस से सीधे और शेष भारत में निर्मित होंगे. प्रारंभिक हिस्सेदारी में 30% स्वदेशी सामग्री होगी, जिसे 60% तक बढ़ाया जाएगा.

नई दिल्ली : भारत ने अपनी वायु शक्ति को और मजबूत करने के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना को पहला महत्वपूर्ण मंज़िल पार कर लिया है. डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और अब इसे आगे की स्वीकृति के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल के पास भेजा जाएगा. इसके बाद अंतिम स्वीकृति कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से ली जाएगी.
भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक सहयोग
सौदे की लागत और विमान वितरण
इस प्रस्तावित राफेल सौदे की कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये यानी 36 अरब अमेरिकी डॉलर अनुमानित की गई है. इसमें से 12 से 18 विमान पूरी तरह तैयार अवस्था में फ्रांस से सीधे भारत लाए जाएंगे, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा. इस तरह से भारत में विमान निर्माण उद्योग को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
‘मेक इन इंडिया’ पहल और स्वदेशी हिस्सेदारी
विमानों के निर्माण में स्वदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना है. प्रारंभिक चरण में इन विमानों में लगभग 30 प्रतिशत भारतीय उपकरण और सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे बाद में 60 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है. यह दर सामान्य ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा सौदों की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन समय के साथ इसे बढ़ाकर अधिक आत्मनिर्भर बनाने की योजना है.
भारतीय हथियार और तकनीकी नियंत्रण
भारत चाहता है कि इन राफेल विमानों में भारतीय हथियार और प्रणालियाँ लगाई जा सकें. हालांकि, विमानों से जुड़े सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेगा. यदि यह सौदा अंतिम रूप ले लेता है, तो भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान होंगे, जिसमें वर्तमान में वायुसेना के 36 और नौसेना के 26 विमान शामिल हैं.
भारत की वायु शक्ति पर प्रभाव
यह सौदा भारतीय वायु सेना और नौसेना की ताकत को नए स्तर तक बढ़ाएगा. साथ ही यह देश में विमान निर्माण और उन्नत रक्षा तकनीक को विकसित करने में मदद करेगा. राफेल विमानों की खरीद न केवल सैन्य क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत बनाएगी.


