नई दिल्लीः गणतंत्र दिवस परेड 2026 में भारतीय सेना इस बार कुछ ऐसा पेश करने जा रही है, जो आधुनिक युद्ध तकनीक की दिशा में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाएगा. कर्तव्य पथ पर पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस अत्याधुनिक ड्रोन प्रणाली की झलक देखने को मिलेगी. ‘ईगल ऑन आर्म’ और ‘मिलेनियम ड्रोन आर्मी’ जैसे महत्वाकांक्षी सैन्य अभियानों के तहत तैयार किए गए ये ड्रोन भारतीय सेना की भविष्य की युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं.
हर वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना अपने परंपरागत शौर्य के साथ-साथ आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन करती है. इस बार सेना का फोकस भविष्य के युद्ध साधनों पर है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने तकनीकी मजबूती को और तेज़ी से आगे बढ़ाया है. इसी कड़ी में ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली को प्राथमिकता दी गई, जिसे अब परेड के ज़रिए देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा.
भारतीय सेना ने ड्रोन तकनीक को सशक्त बनाने के लिए ‘ईगल ऑन आर्म’ और ‘मिलेनियम ड्रोन आर्मी’ जैसे विशेष मिशन शुरू किए. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ऐसे ड्रोन विकसित करना है, जो न केवल निगरानी में सक्षम हों बल्कि आवश्यकता पड़ने पर सटीक हमला भी कर सकें. इन ड्रोन की मारक क्षमता और लक्ष्य पहचानने की क्षमता इन्हें पारंपरिक हथियारों से अलग बनाती है.
इन उन्नत ड्रोन के निर्माण में सेना के इंजीनियरिंग कोर की अहम भूमिका रही है. इस परियोजना में लगभग 40 एमटेक योग्य अधिकारी और 500 से अधिक तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए गए. इन सभी ने मिलकर ऐसे ड्रोन तैयार किए, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप हैं. महीनों की मेहनत और परीक्षण के बाद इन ड्रोन को सेना के बेड़े में शामिल किया गया.
इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इनमें इस्तेमाल की गई एआई तकनीक है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ये ड्रोन अपने आसपास की गतिविधियों का विश्लेषण करने, लक्ष्य की पहचान करने और बेहद सटीक तरीके से हमला करने में सक्षम हैं. इनकी भेदक क्षमता इतनी प्रभावशाली है कि कई किलोमीटर दूर से भी हलचल को पहचानकर कार्रवाई की जा सकती है. इसी कारण इनका नाम ‘ईगल’ रखा गया है, जो तेज़ दृष्टि और सटीक निशाने का प्रतीक माना जाता है.
सेना का दावा है कि ये ड्रोन किसी भी मौसम और परिस्थिति में काम करने में सक्षम हैं. ये बिना आवाज़ किए दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, इसलिए इन्हें ‘मूक योद्धा’ भी कहा जा रहा है. सीमावर्ती इलाकों से लेकर संवेदनशील क्षेत्रों तक, इन ड्रोन की तैनाती सेना को रणनीतिक बढ़त दिला सकती है. First Updated : Saturday, 24 January 2026