टेलीग्राम पर आया 'NEET का असली पेपर'! बिहार में फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार

21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम से पहले बिहार में फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये गिरोह छात्रों को कथित तौर पर परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी कर रहा था.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में पेपर लीक विवाद के कारण परीक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे. मामले की जांच अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि बिहार से सामने आए एक नए खुलासे ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है. 21 जून को होने वाले री-एग्जाम से पहले पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो छात्रों को कथित तौर पर परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी कर रहा था.

मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्रवाई में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम का इस्तेमाल कर छात्रों और उनके परिवारों को निशाना बना रहे थे. इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है.

टेलीग्राम चैनलों के जरिए फैलाया जा रहा था जाल

पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने कई टेलीग्राम चैनल और ग्रुप बना रखे थे. इन प्लेटफॉर्म्स पर दावा किया जाता था कि उनके पास NEET परीक्षा का असली प्रश्नपत्र मौजूद है. परीक्षा से पहले पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से बड़ी रकम वसूली जाती थी. प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव और बेहतर भविष्य की उम्मीद का फायदा उठाकर यह गिरोह लोगों को अपने जाल में फंसाता था. कई अभ्यर्थी जल्दी सफलता पाने की चाह में इन दावों पर भरोसा कर बैठते थे.

एक गुप्त सूचना से खुला पूरा मामला

मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, पुलिस को 2 जून को सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर क्षेत्र से एक गिरोह फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर ऑनलाइन बेच रहा है. सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बालूघाट इलाके में एक किराए के मकान पर छापा मारा. छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किए गए. शुरुआती जांच में मिले डिजिटल सबूतों ने पुलिस को पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद की.

विशेष जांच टीम ने खोली नेटवर्क की परतें

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया. तकनीकी जांच, बैंक खातों की पड़ताल और सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी के बाद पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई. कार्रवाई के दौरान हर्ष, अमन कुमार, कन्हैया कुमार उर्फ मानव और हर्ष कनोडिया को भी गिरफ्तार किया गया. पुलिस का मानना है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसका नेटवर्क कई जगहों तक फैला हो सकता है.

पूछताछ में सामने आया ठगी का तरीका

जांच के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे पहले छात्रों से संपर्क स्थापित करते थे. भरोसा जीतने के लिए कुछ नमूना सामग्री भेजी जाती थी और फिर असली प्रश्नपत्र देने का दावा करते हुए ऑनलाइन भुगतान मांगा जाता था. रकम मिलने के बाद या तो नकली पेपर भेज दिया जाता था या फिर पीड़ितों से संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया जाता था. पुलिस के मुताबिक, ठगी से मिलने वाला पैसा मुख्य आरोपी तक पहुंचता था, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था.

मोबाइल फोन से मिल रहे अहम सबूत

गिरफ्तार आरोपियों के पास से अतिरिक्त मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं. इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है. पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कितने छात्रों और अभिभावकों को इस गिरोह ने अपना शिकार बनाया. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार बिहार के बाहर अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड और अन्य संभावित साथियों की भी जानकारी जुटा रही है.

21 जून की परीक्षा से पहले प्रशासन की अपील

री-एग्जाम नजदीक आने के साथ प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति या सोशल मीडिया अकाउंट पर भरोसा नहीं करना चाहिए. विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे गिरोह छात्रों की मानसिक चिंता और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध लिंक, मैसेज या ऑफर से दूरी बनाए रखना जरूरी है.

पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. मुजफ्फरपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि परीक्षा के मौसम में साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में छात्रों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता अपनी मेहनत, तैयारी और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना ही है.

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