इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते जहां पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है, वहीं भारत के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है. देश में पहली बार अंडमान सागर में एक बड़े कच्चे तेल का भंडार मिलने का दावा किया गया है, जिससे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिल सकती है.
ये खुलासा खुद केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने किया है. उन्होंने बताया कि इस भंडार की खुदाई प्रक्रिया अभी चल रही है. अगर ये भंडार वाणिज्यिक रूप से उपयोगी साबित होता है, तो ये भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है.
हरदीप पुरी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में पुष्टि करते हुए कहा कि हमें अंडमान सागर में एक महत्वपूर्ण कच्चे तेल का भंडार मिला है. खुदाई अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन संकेत पॉजिटिव हैं. उन्होंने इस खोज की तुलना दक्षिण अमेरिकी देश गयाना से की, जहां 11.6 अरब बैरल तेल और गैस के भंडार के चलते देश वैश्विक स्तर पर 17वें स्थान पर पहुंच गया. हरदीप पुरी ने कहा कि भारत में ये खोज आर्थिक दृष्टि से उतनी ही अहम हो सकती है.
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि ये खोज भारत की वर्तमान $3.7 ट्रिलियन इकोनॉमी को भविष्य में लगभग पांच गुना तक बढ़ाकर $20 ट्रिलियन तक पहुंचाने में मदद कर सकती है. अगर ये भंडार वाणिज्यिक उपयोग के लिए उपयुक्त साबित होता है, तो ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी निर्भरता को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा.
फिलहाल, भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 85% हिस्सा रूस, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से आयात करता है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है और वैश्विक कीमतों में हलचल का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिलता है. विशेषज्ञों की मानें तो अगर इजरायल-ईरान संघर्ष जल्द नहीं थमता, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं. First Updated : Tuesday, 17 June 2025