उमर नबी पर कड़ा प्रहार: सुरक्षा एजेंसियों की एक्शन स्ट्रीक ने आतंक की हर सोच को दे दी चेतावनी

दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांचकर्ताओं के अनुसार उमर नबी पिछले दो साल से कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा था और कई चरमपंथी ऑनलाइन ग्रुपों से जुड़ गया था।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

नई दिल्ली. सुरक्षा बलों ने पुलवामा में डॉ.उमर नबी के घर को देर रात बम से उड़ा दिया। यह उसी केस से जुड़ा कदम था जिसमें लाल किले के पास कार धमाका हुआ था। उस कार में विस्फोटक भरे थे और उसे उमर नबी ही चला रहा था। धमाके में 13 लोगों की मौत और कई घायल हुए थे। उसका डीएनए उसकी मां के नमूनों से मिला था। इससे पक्की पहचान हो गई थी। पुलिस को शक था कि घर से कुछ सबूत छिपे हो सकते हैं। इसी वजह से यह कठोर कार्रवाई की गई।

कट्टर सोच कैसे बढ़ी

जांच में सामने आया कि उमर नबी पिछले दो साल में काफी बदल गया था। उसकी सोच अलग दिशा में चली गई थी। वह कई कट्टरपंथी ऑनलाइन ग्रुपों में सक्रिय था। सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों से जुड़ गया था जो गलत रास्ता दिखाते थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो गया था। कई बार उसके फोन से संदिग्ध चैट मिली थी। इसी वजह से एजेंसियां उसे लेकर पहले से सतर्क थीं।

डॉक्टरों का नाम क्यों आया

इस केस में सिर्फ उमर नबी ही नहीं, बल्कि कई डॉक्टर भी पकड़े गए हैं। कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनमें से तीन डॉक्टर हैं। उनमें एक डॉ. अदील का भाई भी शामिल है। पुलिस ने बताया कि ये लोग “व्हाइट कॉलर मॉड्यूल” का हिस्सा थे। ये पेशेवर लोग थे लेकिन अंदर ही अंदर चरमपंथी विचारों को बढ़ावा दे रहे थे। इस नेटवर्क का फैलाव कई राज्यों में पाया गया।

मुजफ्फर का रोल इतना बड़ा क्यों

जांच में एक और बड़ा नाम सामने आया—डॉ. मुजफ्फर। पुलिस ने इंटरपोल से उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस की मांग की है। वह भी उसी टीम का हिस्सा था जिसने 2021 में तुर्की का दौरा किया था। उसके साथ उमर और मुजम्मिल भी गए थे। जांच में पता चला कि वह अगस्त में भारत से दुबई चला गया था। अब माना जा रहा है कि वह अफगानिस्तान में छिपा है। पुलिस उसके हर संपर्क को खंगाल रही है।

केंद्र सरकार क्यों सक्रिय हुई

दिल्ली धमाके के बाद सरकार ने अल फलाह यूनिवर्सिटी पर कड़ा एक्शन लिया है। विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है। ईडी और अन्य एजेंसियों को भी धन की जांच का आदेश दिया गया है। यह कदम गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। सरकार पूरी सच्चाई सामने लाना चाहती है। यह मामला अब केवल एक धमाके का नहीं रहा। यह सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

यूनिवर्सिटी की सदस्यता क्यों हटाई गई

भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता निलंबित कर दी है। संगठन ने कहा कि कोई भी संस्था तभी सदस्य रह सकती है जब वह नियमों के अनुसार चले। जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसलिए संस्था को सस्पेंड कर दिया गया। यह फैसला भी धमाके और नेटवर्क के खुलासों के बाद लिया गया। सरकार चाहती है कि इस नेटवर्क में शामिल हर व्यक्ति और संस्था की भूमिका साफ हो।

अब जांच किस दिशा में जाएगी

सुरक्षा एजेंसियां अब सभी पकड़े गए लोगों की गतिविधियों को जोड़ रही हैं। मुश्किल यह है कि कई आरोपी अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं। इसलिए जांच कई जगह चल रही है। शुरुआती जांच में स्पष्ट हो गया है कि यह सिर्फ धमाका नहीं था। यह एक बड़ा नेटवर्क था जो देश में अस्थिरता फैलाना चाहता था। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां दावा कर रही हैं कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होंगे।

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