Firozabad murder case: 8 बार जमीन पर पटककर ली थी मासूम की जान, कोर्ट ने 41 दिन के अंदर सुनाई फांसी की सजा
फिरोजाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की हुई हत्या मामले में आरोपी को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है. अदालत ने महज 41 दिनों के अंदर परिवार को न्याय दिला दी है.

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जिला न्यायालय ने आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है. इस मामले में घटना के सिर्फ 41 दिन के भीतर फैसला आना न्यायिक प्रक्रिया की तेजी का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है.
30 मई को हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात
यह दर्दनाक घटना 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी. सिरसागंज तहसील के गांव बामई निवासी रति अपने डेढ़ वर्षीय बेटे आरव के साथ रह रही थी. इसी दौरान आरोपी विराज ने मासूम बच्चे को कई बार जमीन पर पटककर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी. घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था.
एकतरफा प्रेम बना हत्या की वजह
जांच में सामने आया कि रति की शादी बदायूं निवासी सुमित उर्फ प्रियंक से हुई थी, लेकिन दोनों के बीच घरेलू विवाद चल रहा था. इसी बीच रिश्ते में फुफेरा देवर लगने वाला विराज रति पर शादी का दबाव बना रहा था. रति ने अपने बच्चे का हवाला देकर उससे शादी करने से इनकार कर दिया. पुलिस के अनुसार इसी नाराजगी में आरोपी ने मासूम आरव की हत्या कर दी.
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The mother had rejected Jitendra’s marriage proposals. Viewing the innocent child as an "obstacle" to marrying… pic.twitter.com/tnZTDc8EV7— ज़िद्दी नागरिक (@ZiddiNaagrik) May 31, 2026
In a horrific incident in Shikohabad, Firozabad, Uttar Pradesh, 1.5-year-old Aarav was brutally murdered by a man named Jitendra Pathak.
6 घंटे में गिरफ्तारी
घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को करीब छह घंटे के भीतर मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मात्र छह दिन में जांच पूरी कर 13 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य अहम सबूत जुटाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया.
अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत में मामले की त्वरित सुनवाई हुई. अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से केवल एक गवाह पेश किया गया. सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई.
41 दिन में मिला इंसाफ
इस मामले में सिर्फ 41 दिनों के भीतर फैसला आने को न्याय व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. अदालत ने माना कि यह अपराध बेहद जघन्य और अमानवीय था, इसलिए दोषी को सबसे कठोर सजा देना ही न्यायसंगत है. इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने के साथ-साथ समाज में भी कड़ा संदेश गया है कि मासूमों के खिलाफ ऐसे अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.


