बारिश क्यों हो रही है गायब? अल नीनो के असर ने बदली मॉनसून की चाल, मौसम वैज्ञानिकों ने दी बड़ी जानकारी

अल नीनो के प्रभाव से इस बार मॉनसून का पैटर्न असामान्य बना हुआ है. कहीं भारी बारिश हो रही है तो कहीं लंबे समय तक सूखे जैसे हालात हैं. मौसम वैज्ञानिकों ने जुलाई के अंतिम दिनों में राहत मिलने की संभावना जताई है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में इस बार मॉनसून का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है. कहीं कुछ ही घंटों में रिकॉर्ड बारिश हो रही है, तो कई इलाकों में कई दिनों तक बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही. मौसम के इस असामान्य व्यवहार ने सबसे ज्यादा चिंता किसानों की बढ़ा दी है, क्योंकि खेती का बड़ा हिस्सा अब भी बारिश पर निर्भर है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मॉनसून की इस अनियमितता के पीछे प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रहा अल नीनो प्रमुख कारण हो सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, जब अल नीनो सक्रिय होता है तो उसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर दिखाई देता है. भारत में भी इसका प्रभाव मॉनसून की चाल पर पड़ सकता है. ऐसे समय में बारिश सामान्य तरीके से पूरे मौसम में समान रूप से नहीं होती, बल्कि उसका पैटर्न बदल जाता है. यही कारण है कि कुछ क्षेत्रों में बहुत कम समय में भारी वर्षा दर्ज होती है, जबकि दूसरे इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती. इससे मौसम में असंतुलन पैदा होता है और लोगों को अचानक बदलते हालात का सामना करना पड़ता है.

टुकड़ों में सक्रिय रहता है मॉनसून

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो वाले वर्षों में मॉनसून लगातार सक्रिय रहने के बजाय अलग-अलग चरणों में काम करता है. कभी कुछ दिनों तक तेज बारिश होती है और उसके बाद कई दिनों तक लगभग सूखे जैसी स्थिति बन जाती है. इस तरह का उतार-चढ़ाव खेती, जल भंडारण और दैनिक जीवन तीनों को प्रभावित करता है. जिन इलाकों में ज्यादा बारिश होती है, वहां जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जबकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में खेतों में नमी की कमी होने लगती है.

किसानों के सामने बढ़ी चुनौती

बारिश की अनिश्चितता का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ता है. समय पर बारिश न होने से बुवाई, सिंचाई और फसलों की शुरुआती बढ़त प्रभावित हो सकती है. वहीं, अचानक होने वाली अत्यधिक बारिश भी खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. कई किसान अब अगले सक्रिय मॉनसून चरण का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनकी फसलों को पर्याप्त पानी मिल सके. मौसम की यह स्थिति कृषि कार्यों की योजना बनाना भी कठिन बना देती है.

जुलाई के आखिर में राहत की उम्मीद

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल मॉनसून की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि जुलाई के अंतिम दिनों में मॉनसून फिर से सक्रिय होगा और कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है. यदि ऐसा होता है तो खेती-किसानी को राहत मिलने की संभावना है और जल स्रोतों में भी सुधार होगा. हालांकि, मौसम की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति हर कुछ दिनों में बदल सकती है. इसलिए किसी भी क्षेत्र में बारिश की संभावना और उसके प्रभाव को समझने के लिए आधिकारिक मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देना जरूरी है. फिलहाल देश के कई हिस्सों में लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हैं और सभी को उम्मीद है कि मॉनसून जल्द ही फिर से रफ्तार पकड़ेगा, जिससे खेती और जल संसाधनों दोनों को राहत मिल सकेगी.

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