15 मौतों के पीछे 10 साल पुरानी चूक, जिस बिल्डिंग पर चलना था बुल्डोजर, वहीं बन गया मौत का जाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है. यह आग ऊषा मेहता मार्ग पर स्थित एक त्रिस्तरीय कमर्शियल बिल्डिंग में लगी थी, जिसमें 15 बेकसूर लोगों की जान चली गई.

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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है. यह आग ऊषा मेहता मार्ग पर स्थित एक त्रिस्तरीय कमर्शियल बिल्डिंग में लगी थी, जिसमें 15 बेकसूर लोगों की जान चली गई. इनमें ज्यादातर एनीमेशन सेंटर के छात्र थे. इस दर्दनाक हादसे के बाद अब सरकारी दस्तावेजों से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिकॉर्ड के मुताबिक, जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उस पर साल 2016 में ही अवैध निर्माण के चलते डेमोलिशन की तलवार लटकी थी, लेकिन बाद में इस आदेश को रहस्यमयी ढंग से वापस ले लिया गया.

बुल्डोजर चलाने का आदेश

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित इस 1992 वर्ग फुट के भूखंड के लिए 20 अगस्त 2014 को एक आवासीय नक्शा पास किया गया था. लेकिन नियमों को ताक पर रखकर यहां कमर्शियल निर्माण शुरू कर दिया गया. साल 2016 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस अवैध निर्माण पर मुकदमा दर्ज किया और सुनवाई के बाद 10 मई 2016 को इमारत को ढहाने का अंतिम आदेश पारित कर दिया. रसूख और कानूनी दांवपेंच के खेल में मकान मालिकों ने इस आदेश को चुनौती दी और महज दो महीने के भीतर 5 जुलाई 2016 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अपने ही ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया.

कई बार बदली गई मालिकाना हक की रजिस्ट्री

जांच में यह बात भी सामने आई है कि 1980 में लॉटरी के जरिए आवंटित हुए इस प्लॉट का मालिकाना हक पिछले कुछ दशकों में कई बार बदला गया. साल 2005 में यह संपत्ति सेल डीड के माध्यम से विजय कुमार और ऊषा के नाम ट्रांसफर हुई, साल 2013 में इसे वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला ने खरीद लिया, और अगस्त 2014 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आधिकारिक तौर पर इस इमारत को नए मालिकों के नाम म्यूटेट कर दिया.

एसी डक्ट की चिंगारी और मौतों का ट्रैप

प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में संकेत मिले हैं कि सोमवार दोपहर करीब 3 बजे सबसे पहले इमारत के एयर-कंडीशनिंग डक्ट में शॉर्ट सर्किट से आग लगी. ऊपरी मंजिलों पर चल रहे एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और भूतल पर स्थित पेट शॉप व क्लीनिक के कारण अंदर काफी ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी. देखते ही देखते जहरीले धुएं ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया. इमारत में आपातकालीन निकास न होने के कारण छात्र ऊपरी मंजिलों पर ही फंस गए.

गैर-जमानती धाराओं में सख्त कार्रवाई

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और 19 दमकल गाड़ियों की टीम को फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए कंक्रीट की दीवारों को काटना पड़ा. प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने साफ कहा है कि बिल्डिंग मानकों के उल्लंघन और दमकल एनओसी की गहन जांच की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी. First Updated : Tuesday, 23 June 2026