लखनऊ: अयोध्या में राम मंदिर के लिए आए चंदे में गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने रविवार 21 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक SIT ने मुख्यमंत्री को छह दिन तक चली लगभग 60 घंटे की जांच का पूरा ब्योरा दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय SIT बनाई थी। टीम में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, IG किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
टीम ने छह दिन तक मंदिर परिसर और उससे जुड़े केंद्रों पर जांच की। इस दौरान 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हुई और चंदे से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। SIT को जल्द से जल्द अपनी अंतिम रिपोर्ट भी देनी है।
SIT की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि चंदे के प्रबंधन में कई कमियां मिली हैं। दान पेटियों से कैश, सोना और चांदी के गहने निकालने, उन्हें गिनती केंद्र तक ले जाने और गिनती की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई थी।
सूत्रों के मुताबिक कैश को बैंक तक पहुंचाने के लिए जो डबल-लॉक सिस्टम होना चाहिए था, उसका पालन नहीं हो रहा था। नियम के अनुसार इसकी दो चाबियां अलग-अलग लोगों के पास होनी चाहिए थीं, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं मिला।
रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम नहीं है। हालांकि कुछ कर्मचारियों, SBI के स्टाफ और कैश गिनने वाली निजी कंपनियों के लोगों की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
राम मंदिर परिसर में कुल 35 दान पेटियां लगी हैं। इन्हें दिन में दो बार खोला जाता है। गिनती का काम दो शिफ्ट में होता है, पहली सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी दोपहर 2 से रात 8 बजे तक।
हर शिफ्ट में करीब 20 लोग शामिल होते हैं। गिनती यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में होती है, जो मंदिर से करीब 200 मीटर दूर है। SIT ने इस प्रक्रिया से जुड़े अनिल मिश्रा समेत कई लोगों से पूछताछ की है।
SIT ने अभी सिर्फ प्रारंभिक आकलन सौंपा है। 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देनी है। जांच के दौरान सोने, चांदी और कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने के बाद ट्रस्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों का कहना है कि करीब 25 लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल ट्रस्ट के अधिकारियों और नामजद कर्मचारियों की यात्रा पर रोक लगी है। अब सबकी नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और उस पर सरकार के फैसले पर टिकी है। First Updated : Sunday, 21 June 2026