कौन हैं कृष्ण मोहन? बने बने राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव, चंपत राय की जगह संभालेंगे कमान

ट्रस्ट की दो घंटे से ज्यादा चली बैठक के बाद महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। बैठक के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चोरी के आरोपों से ट्रस्ट "बहुत आहत" है।

Sachin Hari Legha

अयोध्या: अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े दान विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र कैडर के पूर्व IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। वो अब चंपत राय की जगह ट्रस्ट के रोजमर्रा के काम देखेंगे।  

क्यों हुआ ये बदलाव?   

ट्रस्ट की दो घंटे से ज्यादा चली बैठक के बाद महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। बैठक के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चोरी के आरोपों से ट्रस्ट "बहुत आहत" है। उन्होंने मांग की कि दोषियों और उनके साथियों को पकड़कर कड़ी सजा दी जाए।  

गिरि ने कहा, "चोरी तो चोरी होती है। SIT जांच कर रही है। ये प्रशासन की जिम्मेदारी है। हम जोर देकर कह रहे हैं कि दोषियों को पकड़ा जाए और उन्हें उनके अपराध की सजा मिले।" ट्रस्ट अब 22 जुलाई को फिर बैठक करेगा। उसमें यूपी सरकार द्वारा बनाई गई SIT की जांच रिपोर्ट पर चर्चा होगी।  

कृष्ण मोहन कौन हैं?   

73 साल के कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले हैं। वो महाराष्ट्र कैडर के पूर्व इंडियन फॉरेस्ट सर्विस अधिकारी हैं। आरएस से भी उनका पुराना नाता है। मोहन संघ के वरिष्ठ सदस्य रह चुके हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।  

सामाजिक कार्यों से वो सालों से जुड़े हैं। ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सितंबर 2025 में उन्हें ट्रस्ट का स्थायी सदस्य बनाया गया था। उस वक्त ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगाई थी।  

क्या बोले कृष्ण मोहन!   

नियुक्ति के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि जो घटना हुई है उससे हर कोई "बहुत दुखी" है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।  

उन्होंने माना कि इस घटना से ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचा है। "मैं इस नकारात्मक सोच को दूर करने के लिए हर संभव कदम उठाऊंगा," उन्होंने कहा। साथ ही ये भी माना कि ट्रस्ट के कामकाज में कुछ कमियां थीं जिनका कुछ लोगों ने फायदा उठाया।  

अंतरिम महासचिव के तौर पर कृष्ण मोहन तब तक काम संभालेंगे जब तक नए स्थायी महासचिव की नियुक्ति नहीं हो जाती। उन्होंने साफ कहा, "मुझे कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी मिली है। हम इस बात पर अडिग रहेंगे कि दोषियों को न्याय के अनुसार सजा मिले और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।"  

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