राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: चंपत राय-अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब कृष्ण मोहन संभालेंगे जिम्मेदारी
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। अब फिलहाल दोनों के कामकाज की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है।

अयोध्या: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक के बाद बड़ा फैसला लिया गया है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. अब फिलहाल दोनों के कामकाज की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है.
कोषाध्यक्ष ने दी जानकारी
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने मीडिया से बात की. उन्होंने मंत्र पढ़कर बैठक की शुरुआत की और कहा कि ये बेहद असाधारण परिस्थितियों में हुई बेहद जरूरी बैठक थी.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (न्यास) की एक बैठक आज न्यास के अध्यक्ष पूज्य नृत्य गोपाल दास जी महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के पश्चात जारी वक्तव्य
A meeting of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra (Trust) was held today under the chairmanship of the Trust’s… pic.twitter.com/Sv7Gi9GWQv— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) July 6, 2026
गोविंद गिरी ने कहा, "सबसे बड़ा दुख ये है कि जिस हालात का सामना करना पड़ रहा है वो बहुत दुखद है. राम मंदिर के लिए लोगों ने अपने प्राण, परिवार और करियर की परवाह नहीं की. और अब उसी मंदिर में चोरी की बात सामने आई है. इससे हम सब लज्जित हैं और दुखी हैं. कितने की चोरी हुई ये बाद की बात है." उन्होंने साफ किया कि ट्रस्ट की छवि और पारदर्शिता को बचाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं.
किसने संभाली कमान
गोविंद गिरी के मुताबिक बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया. चंपत राय ने दान विवाद सामने आने के बाद खुद इस्तीफा दिया था। इसी पर अंतिम फैसला लेने के लिए ट्रस्टी जुटे थे.
अभी नए महासचिव के नाम का ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन अंतरिम व्यवस्था के तौर पर कृष्ण मोहन को जिम्मेदारी दी गई है। वो चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों के काम देखेंगे. ट्रस्ट की रोजमर्रा की फाइलें, मीटिंग और प्रशासनिक काम अब कृष्ण मोहन के पास रहेंगे. कोषाध्यक्ष गोविंदानंद गिरी ने ही बैठक की पूरी जानकारी मीडिया को दी.
ट्रस्ट ने क्या कहा?
ट्रस्ट ने माना कि दान में गड़बड़ी के आरोपों के बाद विश्वास बनाए रखना जरूरी है. इसी वजह से तत्काल इस्तीफे स्वीकार किए गए और वैकल्पिक व्यवस्था की गई. ट्रस्ट का कहना है कि SIT और पुलिस की जांच पूरी होने तक ट्रस्ट किसी भी तरह की लीपापोती नहीं करेगा.
अगली बैठक में नए महासचिव की नियुक्ति और ट्रस्ट के ढांचे में प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा होगी. साथ ही 2025-26 की ऑडिटेड बैलेंस शीट को मंजूरी देने और CEO की नियुक्ति का प्रस्ताव भी एजेंडे में है. ट्रस्ट ने अपील की है कि श्रद्धालु दान को लेकर चिंता न करें. मंदिर निर्माण और व्यवस्थाएं पहले की तरह चलती रहेंगी. दान की एक-एक पाई का हिसाब SIT की रिपोर्ट के बाद सार्वजनिक किया जाएगा.


