मणिपुर में उग्रवादियों का घातक हमला, असम राइफल्स के 2 जवान शहीद

मणिपुर के उखरुल में संदिग्ध आतंकवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया कर है, जिसमें 2 जवान शहीद हो गए और कई अन्य घायल हुए.

Yashika Jandwani

नई दिल्ली: मणिपुर में सोमवार को एक बार फिर हिंसा का खूनी चेहरा सामने आया। उखरुल जिले में संदिग्ध उग्रवादियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। इस हमले में असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए और कई अन्य घायल हुए हैं। पुलिस के मुताबिक घटना दोपहर करीब 1.30 बजे उखरुल जिले के नुंगशांग खोंग इलाके में हुई। 40 असम राइफल्स का काफिला इस रास्ते से गुजर रहा था। तभी घात लगाए बैठे उग्रवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमले में दो जवान मौके पर ही शहीद हो गए।

कैसे हुआ हमला?   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई जवानों को गोलियां लगीं और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर भेजे गए। पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया है। सुरक्षा बलों का मकसद हमलावरों को जल्द से जल्द पकड़ना है।  

गवर्नर और गृह मंत्री ने की निंदा!   

मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला ने राजभवन से बयान जारी कर इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि समाज में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे हमले सरकार के "शांति और सुरक्षा बनाए रखने के सामूहिक संकल्प" को कमजोर नहीं कर सकते। राज्य के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने भी हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि ऐसे हमले हिंसा प्रभावित राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाते हैं। गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सुरक्षा बल दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।  

मणिपुर में क्यों बढ़ी है हिंसा?   

मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा चल रही है। इसके बाद से सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में लगातार सर्च और डोमिनेशन ऑपरेशन चला रहे हैं।  

इस संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। कई बार शांति वार्ता और सुरक्षा के इंतजाम के बाद भी राज्य में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।  

उखरुल का ये हमला इसी लंबे संघर्ष की एक और कड़ी माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर फोकस कर रही हैं ताकि आगे ऐसे हमले रोके जा सकें।

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