5 साल का स्थिर नेतृत्व बना बदलाव की ताकत, उत्तराखंड में लंबे समय से लंबित सुधार हुए साकार
पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने पिछले पांच सालों में स्थिरता और सुधारों को अपनी पहचान बनाया है. धामी सरकार की सबसे बड़ी पहचान समान नागरिक संहिता रही. 27 जनवरी 2025 से लागू हुए इस कानून के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया जिसने शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान नियम लागू किए.

देहरादून: पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने पिछले पांच सालों में स्थिरता और सुधारों को अपनी पहचान बनाया है. राज्य में पहले जो राजनीतिक अस्थिरता रहती थी, उसकी जगह अब नीतियों में निरंतरता और तेज कार्यान्वयन ने ले ली है. सरकार का कहना है कि इसी वजह से लंबे समय से अटके कानून बन पाए और बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और उद्योग में बड़े निवेश हो सके.
यूसी लागू करने वाला पहला राज्य
धामी सरकार की सबसे बड़ी पहचान समान नागरिक संहिता रही. 27 जनवरी 2025 से लागू हुए इस कानून के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया जिसने शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक समान नियम लागू किए. सरकार के मुताबिक यूसीसी का मकसद कानूनी एकरूपता और लैंगिक समानता लाना है. इसके तहत बाल विवाह, बहुविवाह, तीन तलाक, हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर रोक लगी है. मसौदा समिति का कहना है कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए एक जैसा नागरिक ढांचा देता है.
नकल पर सख्त कानून
इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों के बाद 2023 में उत्तराखंड लोक परीक्षा अधिनियम लाया गया. सरकार इसे देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून बताती है. इसमें संगठित नकल रैकेट चलाने वालों को आजीवन कारावास और 10 करोड़ तक का जुर्माना है. उम्मीदवारों के लिए 10 साल तक परीक्षा पर बैन और जेल का प्रावधान भी है.
कानून व्यवस्था के लिए 2024 में संपत्ति क्षति वसूली अध्यादेश आया. इसके तहत दंगे, बंद या विरोध में सरकारी-निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली की जाएगी. पुलिस के खर्च भी वसूले जाएंगे और 8 लाख तक जुर्माना लग सकता है। दावों के निपटारे के लिए विशेष न्यायाधिकरण भी बना है.
धर्मांतरण कानून और भूमि अतिक्रमण पर कार्रवाई
बता दें, अगस्त 2024 में धर्मांतरण विरोधी कानून को और सख्त किया गया. अब यह सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप तक लागू है. उत्तराखंड ऐसा करने वाला पहला राज्य है. सजा 10 साल से बढ़ाकर 14 साल कर दी गई है. गंभीर मामलों में 20 साल या उम्रकैद भी हो सकती है. डीएम को बिना वारंट गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती का अधिकार मिला है.
इसके साथ ही सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया. इसमें सैकड़ों अवैध ढांचे हटे और हजारों एकड़ जमीन वापस ली गई. जिलों को नए बसने वालों के सत्यापन के निर्देश भी दिए गए.
जनता को किन-किन योजनाओं का मिला लाभ
सरकार ने योजनाओं में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है. श्रमिक कल्याण बोर्ड ने पिछले साल 24,000 मजदूरों को 93 करोड़ से ज्यादा डीबीटी से दिए. मातृत्व, शिक्षा और विवाह सहायता सीधे खातों में पहुंच रही है. महिलाओं के लिए लखपति दीदी योजना में 5 लाख तक का ब्याज मुक्त लोन मिल रहा है. एक लाख महिलाएं आय का लक्ष्य पार कर चुकी हैं. सहकारी समितियों में 33% आरक्षण भी दिया गया.
इंफ्रा में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लगभग तैयार है, जिससे यात्रा का समय ढाई घंटे घटेगा. राज्य को दो वंदे भारत ट्रेन भी मिली हैं. इसके साथ ही स्वास्थ्य में अटल आयुष्मान के तहत 59 लाख से ज्यादा कार्ड बन चुके हैं और 15 लाख लोग कैशलेस इलाज ले चुके हैं.


