World Hindi Day 2025: भारत विविधताओं का देश है, जहां कई भाषाएं बोली जाती हैं. लेकिन हिंदी का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है. यह न केवल भारत की राजभाषा है, बल्कि विश्वभर में 61 करोड़ से अधिक लोग इसे बोलते और समझते हैं. हिंदी के महत्व को उजागर करने के लिए हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस और 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है. हालांकि, दोनों दिवसों का उद्देश्य और इतिहास अलग-अलग है. आइए जानते हैं इनके बीच का अंतर.
10 जनवरी: विश्व हिंदी दिवस
आपको बता दें कि दुनिया भर में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 1974 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन से हुई थी. इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इसके बाद, 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की. यह दिवस भारत के बाहर भी हिंदी के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित करता है.
14 सितंबर: राष्ट्रीय हिंदी दिवस
वहीं आपको बता दें कि भारत में 14 सितंबर को हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया. 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1953 से हर साल राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाने की परंपरा शुरू की. इस दिन हिंदी भाषा के महत्व पर जोर दिया जाता है और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाते हैं.
हिंदी का ऐतिहासिक विकास
बताते चले कि हिंदी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है. वैदिक संस्कृत से लेकर प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं के विकास के बाद हिंदी का निर्माण हुआ. हिंदी का इतिहास तीन प्रमुख कालों में बंटा हुआ है:-
विश्व हिंदी दिवस 2025 की थीम
इसके अलावा आपको बता दें कि साल 2025 में विश्व हिंदी दिवस की थीम है, ''हिंदी एकता और सांस्कृतिक गौरव की वैश्विक आवाज.'' यह थीम हिंदी के सांस्कृतिक महत्व और वैश्विक पहचान को और मजबूत करने का संदेश देती है. First Updated : Friday, 10 January 2025