अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को फिर से अमेरिकी नियंत्रण में लेने की इच्छा व्यक्त की है. ट्रंप लगातार इस मुद्दे पर जोर दे रहे हैं और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट के जरिए चेतावनी दी कि यदि अफगानिस्तान एयरबेस अमेरिका को वापस नहीं देता है, तो परिणाम गंभीर होंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका फिलहाल अफगान अधिकारियों से बातचीत कर रहा है और जल्द ही एयरबेस को अपने कब्ज़े में लेना चाहता है.
हालांकि, अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को किसी भी सैन्य वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी. तालिबानी विदेश मंत्रालय के राजनीतिक निदेशक जाकिर जलाली ने X पोस्ट पर लिखा कि अफगानिस्तान और अमेरिका आपसी बातचीत और साझा हितों के आधार पर आर्थिक व राजनीतिक रिश्ते विकसित कर सकते हैं, लेकिन सैन्य वापसी को मंजूरी नहीं दी जाएगी. यह स्पष्ट संदेश है कि तालिबान किसी भी तरह की अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को स्वीकार नहीं करेगा.
बगराम एयरबेस दो दशकों तक NATO फोर्सेस का मुख्य केंद्र रहा है. यह बेस अफ़ग़ान सेना को तब सौंपा गया था जब तालिबान ने देश पर कब्जा कर लिया. ट्रंप ने ब्रिटेन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अमेरिका को यह एयरबेस मुफ्त में दिया गया. उन्होंने कहा कि बगराम एयरबेस चीन के परमाणु हथियार बनाने वाली जगह से केवल एक घंटे की दूरी पर है, इसलिए यह अमेरिकी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है.
ट्रंप ने पहले भी कहा है कि अमेरिका को पनामा नहर से लेकर ग्रीनलैंड तक रणनीतिक ठिकानों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने 18 सितंबर को संकेत दिया कि अमेरिका बगराम एयरबेस को अपने नियंत्रण में ले सकता है. हालांकि, इस पर किसी तरह का समझौता या प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है. अगर ऐसा होता है, तो यह तालिबान के लिए बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को देश से बाहर निकालने के लिए संघर्ष किया था.
बगराम एयरबेस 11 सितंबर 2001 के बाद अमेरिका के अफगान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा एयरबेस था. यहां अमेरिकी सैनिकों के लिए बर्गर किंग और पिज़्ज़ा हट जैसी सुविधाएं थीं. एयरबेस में इलेक्ट्रॉनिक्स, अफ़ग़ान कालीन, और अन्य दुकानों के साथ विशाल जेल परिसर भी मौजूद था. यह बेस अमेरिका की रणनीतिक उपस्थिति और सैनिकों की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा.
हालांकि, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि बगराम एयरबेस को दोबारा कब्जा करना आसान नहीं होगा. अमेरिका ने 2021 में अफ़गानिस्तान से अपने सैनिकों के साथ इस एयरबेस को छोड़ दिया था. एयरबेस को फिर से नियंत्रण में लेना रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण और कठिन काम होगा, क्योंकि इसमें न केवल सैन्य कार्रवाई बल्कि अफगान सरकार और स्थानीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखना होगा. बगराम एयरबेस पर ट्रंप का जोर और तालिबान की सख्त प्रतिक्रिया इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती है, जिससे अमेरिका, चीन और अफगानिस्तान के बीच रणनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं.
First Updated : Sunday, 21 September 2025