'हमने कभी युद्ध नहीं चाहा...' ईरान का बड़ा दावा, ईरानी नेता ने अमेरिका पर साधा निशाना

इलाही ने अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधते हुए कहा कि ये देश अपनी शर्तें दूसरों पर थोपना चाहते हैं, जबकि उन्हें ऐसा करने का अधिकार किसने दिया.

Shraddha Mishra

भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने मौजूदा वैश्विक तनाव को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा, लेकिन लगातार हमलों ने उसे जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया. उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात के बावजूद बातचीत की गुंजाइश अब भी बनी हुई है.

इजराइल पर दबाव बनाने पर डाला जोर 

इलाही ने अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधते हुए कहा कि ये देश अपनी शर्तें दूसरों पर थोपना चाहते हैं, जबकि उन्हें ऐसा करने का अधिकार किसने दिया, यह बड़ा सवाल है. उन्होंने मौजूदा हालात को “न युद्ध, न शांति” की स्थिति करारते हुए तुरंत संघर्ष विराम की आवश्यकता पर जोर दिया.

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि युद्ध से प्रभावित और ऊर्जा संकट झेल रहे देश अमेरिका और इजराइल पर दबाव क्यों नहीं बना रहे हैं कि वे आक्रामक कार्रवाई रोकें. इलाही के मुताबिक, ओमान में शुरू हुई वार्ता प्रक्रिया जिनेवा तक पहुंची थी और उसमें प्रगति भी हो रही थी, लेकिन अचानक हुए हमलों ने इस प्रक्रिया को बाधित कर दिया.

ईरान को हुआ भारी नुकसान 

ईरानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि हवाई और मिसाइल हमलों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है. उनके अनुसार, इन हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी लोगों, सैन्य अधिकारियों और आम नागरिकों की जान गई. उन्होंने आरोप लगाया कि एक स्कूल पर हमले में बड़ी संख्या में मासूम बच्चियां मारी गईं. इलाही ने कहा कि अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और कई हजार घायल हुए हैं, जबकि बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है.

इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग को खारिज कर दिया और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए डटा रहा. उन्होंने कहा कि कोई भी देश ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं कर सकता.

कब कही युद्धविराम की बात

इलाही ने यह भी दावा किया कि करीब 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और इजराइल अपने उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सके, जिसके बाद युद्धविराम की बात सामने आई. हालांकि, उन्होंने इसे वास्तविक युद्धविराम नहीं बल्कि “न युद्ध, न शांति” की स्थिति बताया. ईरान के अंदरूनी हालात पर उन्होंने कहा कि देश में स्थिति सामान्य है और लोग अपने रोजमर्रा के कामकाज में लगे हुए हैं. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षित रहा है और ईरान इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करता आया है, जिससे वैश्विक व्यापार को फायदा हुआ है.

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