नई दिल्ली: भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की तीखी निंदा की है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने इन हमलों को न केवल UN चार्टर का उल्लंघन बताया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के भी विरुद्ध करार दिया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पहले से ही गंभीर मानवीय संकट झेल रहे क्षेत्र में निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की मांगों का समर्थन करते हैं.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने कंधार के स्पिन बोल्डाक क्षेत्र में हवाई हमले किए. वहीं, पाकिस्तान ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि अफगान बलों ने चमन बॉर्डर पर “बिना उकसावे के गोलीबारी किया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने कहा कि पाकिस्तान अपनी क्षेत्रीय अखंडता और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सतर्क और दृढ़ संकल्पित है. यह घटना तब हुई जब दोनों देशों के बीच बातचीत का एक और दौर खत्म हुए मुश्किल से 48 घंटे ही बीते थे.
भारत ने पाकिस्तान के व्यापार और ट्रांजिट मार्गों को अवरुद्ध करने की कार्रवाई को लेकर गंभीर चिंता जताई और इसे ‘व्यापार और पारगमन आतंकवाद’ करार दिया. भारत ने कहा कि महत्वपूर्ण मार्गों का बंद होना विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन है और यह अफगानिस्तान जैसे संवेदनशील, जर्जर देश के खिलाफ खुली धमकियां और युद्ध की कार्रवाई के समान है. अफगानिस्तान, जो एक भू-आबद्ध राष्ट्र है, आवश्यक आपूर्तियों के लिए सीमा पार आवाजाही पर बुरी तरह निर्भर है.
भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता के प्रति अपने दृढ़ समर्थन को दोहराया. उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि तालिबान के साथ व्यवहार में व्यावहारिकता अपनाई जाए और नीतियों का उद्देश्य दंडात्मक कदमों के बजाय सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करना होना चाहिए.
भारत ने चेतावनी दी कि यदि एकतरफा कदम जारी रहे तो पिछले साढ़े चार वर्षों से जारी हमेशा की तरह व्यापार स्थिति बनी रहेगी. उसने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वे ऐसी परिष्कृत नीतियां अपनाएं जो अफगान जनता तक स्थायी लाभ पहुंचा सकें.
भारत ने ISIL, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी संगठनों, विशेषकर ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’, जैसे UN-नामित आतंकवादी समूहों से उत्पन्न खतरे पर भी प्रकाश डाला. भारत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समन्वित प्रयास करने होंगे ताकि ये संगठन सीमा-पार आतंकवाद, समर्थन या संचालन गतिविधियों में शामिल न हो सकें. First Updated : Thursday, 11 December 2025