अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ किए गए सैन्य हमले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे एक रणनीतिक और आवश्यक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को उसके परमाणु ढांचे को दोबारा खड़ा करने से रोकना था.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो संदेश साझा कर इस हमले के पीछे की मंशा और अमेरिका की आगे की नीति को स्पष्ट किया. अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड, सशस्त्र बलों और पुलिस कर्मियों को सीधे संदेश देते हुए हथियार डालने की अपील की.
उन्होंने कहा कि यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें पूरी सुरक्षा और निष्पक्ष व्यवहार की गारंटी दी जाएगी. हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो उन्हें गंभीर और घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. ट्रंप का यह संदेश हमले के तुरंत बाद आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है.
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपने नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा. उनके अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाना था, जो कथित रूप से परमाणु कार्यक्रम से जुड़े थे या जिनका उपयोग इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता था.
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान गुप्त रूप से अपने परमाणु ढांचे को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा था, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता था. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए उठाया है.
इस घटनाक्रम के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से क्षेत्र में भू-राजनीतिक स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है. फिलहाल दुनिया की नजरें ईरान की संभावित प्रतिक्रिया और अमेरिका की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं. First Updated : Saturday, 28 February 2026