क्या सऊदी के बाद अब UAE और कतर भी पाकिस्तान से करेंगे सैन्य गठबंधन? भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

भारतीय अधिकारी पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए हालिया समझौते के प्रभावों की गहन पड़ताल कर रहे हैं. खास तौर पर वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता है तो क्या इस समझौते को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. यह अध्ययन दोनों देशों के रिश्तों और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए अहम है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

UAE and Qatar: पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते (Strategic Mutual Defense Agreement) को लेकर भारत ने एक बार फिर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी काफी मजबूत है और भारत इस रिश्ते में आपसी हितों एवं संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखने की अपेक्षा करता है. यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. गौरतलब है कि यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच साइन हुआ. इस समझौते के तहत यह प्रावधान किया गया है कि किसी भी देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर हमला मानी जाएगी. भारत इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और इसके संभावित क्षेत्रीय प्रभावों का अध्ययन कर रहा है.

भारत ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और सऊदी अरब की साझेदारी हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुई है. हम उम्मीद करते हैं कि यह साझेदारी आपसी हितों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी. उन्होंने बताया कि भारत को पहले से जानकारी थी कि पाकिस्तान और सऊदी अरब इस तरह के समझौते पर विचार कर रहे थे और अब इसे औपचारिक रूप दे दिया गया है.

सामूहिक रक्षा प्रावधान पर भारत की सतर्कता

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अभी तक समझौते के कानूनी प्रावधान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. केवल एक संयुक्त बयान में सामूहिक रक्षा का उल्लेख है जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसमें कोई बाध्यकारी कानूनी व्यवस्था भी शामिल है या नहीं. यही कारण है कि भारत इस समझौते का क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर संभावित असर का गहराई से विश्लेषण कर रहा है.

पाक-सऊदी रिश्तों का इतिहास और भारत की भूमिका

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है. हाल के वर्षों में सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक संकट से उबरने में भी मदद की है. वहीं भारत और सऊदी अरब के बीच पिछले एक दशक में रणनीतिक सहयोग उल्लेखनीय रूप से गहरा हुआ है चाहे वह संयुक्त सैन्य अभ्यास हो या ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग.

पश्चिम एशिया में बदलते समीकरण

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल ने हाल ही में हमास के नेताओं पर सैन्य हमले किए हैं जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं में इजाफा हुआ है. कई अरब देशों ने अमेरिका की सुरक्षा प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं. इस संदर्भ में पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता पश्चिम एशिया की सुरक्षा संरचना को और जटिल बना सकता है.

भारत की सुरक्षा चिंताएं

भारत पश्चिम एशिया को अपने विस्तारित पड़ोस के रूप में देखता है. भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि यदि पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बढ़ता है तो यह समझौता नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है खासकर तब जब इसकी आड़ में पाकिस्तान कोई रणनीतिक कदम उठाए.

अन्य मुस्लिम देशों की संभावित भागीदारी

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि अन्य मुस्लिम देश जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर भी इस समझौते में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस समझौते में कोई ऐसी धारा नहीं है जो किसी अन्य देश के प्रवेश को रोके. आसिफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं इस समझौते के तहत उपलब्ध होंगी.

भारत की कूटनीतिक तैयारी

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि भारत के यूएई और कतर के साथ भी गहरे और व्यापक संबंध हैं. उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर के बीच हुई बातचीत और यूएई की विदेश मामलों की राज्य मंत्री की दिल्ली यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संवाद सतत रूप से जारी हैं.

भारत अब खाड़ी देशों के साथ अपने मजबूत रिश्तों का लाभ उठाकर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है. यह समझौता भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती जरूर है लेकिन भारत की बढ़ती कूटनीतिक पकड़ और सक्रिय भूमिका इसे प्रभावी ढंग से संभालने में सहायक साबित हो सकती है.

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