ताइवान, नेपाल के बाद थाईलैंड में समलैंगिक विवाह को मिली मंजूरी, राजा महा वजीरालोंगकोर्न ने दी मंजूरी

Thailand News: थाइलैंड में समलैंगिक विवाह विधेयक को शाही समर्थन मिला है. राजा महा वजीरालोंगकोर्न ने संसद से पास समलैंगिक विवाह विधेयक को शाही स्वीकृति दे दी है. इसी के साथ थाईलैंड दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है जो समलैंगिक विवाह को मान्यता दिया है. ऐसे में अब जनवरी 2025 में थाईलैंड के भीतर समलैंगिक विवाह हो सकेंगे.

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Thailand News: थाईलैंड के राजा ने समलैंगिक विवाह को कानून बना दिया है. आधिकारिक रॉयल गजट ने मंगलवार, 24 सितंबर को जानकारी देते हुए बताया कि थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया में विवाह समानता को मान्यता देने वाला पहला देश बन गया है. राजा महा वजीरालोंगकोर्न ने जून में संसद द्वारा पारित नए कानून को शाही स्वीकृति दी. यह कानून 120 दिनों में प्रभावी हो जाएगा. LGBTQ+ कपल अगले साल जनवरी में अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे.

बता दें कि थाइलैंड से पहले ताइवान और नेपाल में भी समलैंगिक विवाह लिगल है. इन तीनों देश में समलैंगिक जोड़े विवाह के बंधन में बंध सकते हैं. थाईलैंड के में काफी लंबे समय से समलैंगिक विवाह के अधिकार की मांग चल रही थी. इसी साल जून महीने में यह विधेयक संसद के अंदर पास हुआ था. इस कानून के लागू होने के बाद थाईलैंड एशिया का तीसरा ऐसा स्थान बन गया है जहां समलैंगिक जोड़े विवाह बंधन में बंध सकते हैं.

सबसे पहले इस देश में मिली समलैंगिक विवाह की मान्यता

समलैंगिक विवाह कानूनी तौर पर या सामाजिक रूप से मान्यता प्राप्त एक ही लिंग के लोगों के विवाह को कहते हैं. समलैंगिक विवाहों को वैध बनाने वाला पहला देश था नीदरलैंड जहाँ इसे 2001 में कानूनी मान्यता प्राप्त हुई. नीदरलैंड में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के पीछे का तर्क ये था कि लैंगिक अभिविन्यास को ध्यान में न रखते हुए विवाह के लाभ सभी को मिलना एक मानवाधिकार है.

भारत में समलैंगिक विवाह की स्थिति

भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी गई है. भारत में विवाह को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम, 1955, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और मुस्लिम पर्सनल लॉ शामिल हैं. स्पष्ट रूप से समान-लिंग विवाह की अनुमति नहीं देता है. साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था. हालांकि, अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है और समलैंगिक विवाह को मान्यता देने का अधिकार संसद के पास है.

First Updated : Wednesday, 25 September 2024